मैं टॉपर कैसे बना

१.

टॉपर होने का अधिकार सबके पास है ! फिर हमारे बीच इतने कम टॉपर्स क्यों हैं ? मैं स्कूल से घर लौटते समय रोज यही सोचता था ! एक ही बात जब आप कई बार सोचते हैं तो बार – बार सोचने से सोची हुई बातें दिमाग में बार – बार जनम कर मरती हैं ! इच्छा नहीं पूरी होने पर दिमाग में जनम कर बार – बार मरने से बातें भूत बन जाती है और सोचने वाले की दिमाग पर सवार हो जाती है ! मुझ पर टॉपर बनने का भूत सवार हो गया था !
‘ किस बात में टॉपर बनना है ? ‘ मेरी ज़िद से हार कर एक रात भूत ने मुझसे पूछा !
‘ मुझे तो बस टॉपर बनना है ! कोई भी बात हो मुझे कोई फरक नहीं पड़ता ! ‘ मैंने तपाक से जवाब दिया !
‘ तुम्हारा विषय क्या है ?’
‘ जो कुछ स्कूल में होता है वही मेरा विषय है !’
‘ स्कूल में क्या होता है ?’
‘ स्कूल में हम खाना बनाते हैं !’
‘ तो तुम्हे खाना बनाने में टॉप करना है ?’
‘ नहीं, मुझे खाना खाने में टॉप करना है !’
भूत का आश्चर्य भरा चेहरा शायद मुझसे पहले किसी ने नहीं देखा हो ! आश्चर्य से भूत का चेहरा पाकिस्तान के नक़्शे सा डरावना हो गया था ! भूत के चेहरे के नक़्शे में कश्मीर से पानी चूने लगा ! खाने का नाम सुन कर गाँव के भूतों के मुंह में भी पानी आ जाता है !

२.

बचपन में मेरे लिए पका हुआ गर्म खाना बहुत बड़ी लालच थी ! गरीबी की वजह से मैं भूखा रहता, इसी के चलते मेरी माँ मुझे स्कूल भेज देती ! स्कूल के मिड डे मील में रोज पके – पकाये भोजन का लालच एक आशीर्वाद के रूप में मेरे काम आ गयी ! मुफ्त खाने के लिए मैं स्कूल जाता था और खाने में छुपी हुई योजना के मुताबिक खाना खाते – खाते मैं चमत्कारिक रूप से पढ़ना भी सीख गया !

मिड डे मील के कैलोरी का हिसाब किताब रखने के चक्कर में मैं आने, खाने और जाने से ऊपर उठ गया ! दो दूनी चार का पहाड़ा मैंने अपने भूखे पेट की अंतड़ियों से सीखा था ! वो खाली होने पर गुड़ – गुड़ दो, दो दूनी गड़ – गड़ चार करती ! मैं अपने एक हाथ को मुंह तक ले जाता और खाने का इशारा करते हुए दो तिया छह कहता ! गुरूजी ये देख कर कक्षा में मुझे खूब शाबाशी देते ! दू चौके आठ कहते हुए गुरुजी अपने बज्र हाथों को मेरी पीठ पर धम से पटक देते और खूब हँसते ! उनकी हंसी से मिल कर मेरी पीठ पर पड़े धौल का दर्द मेरे चेहरे पर फ़ैल जाता ! दू पंचे दस कहता हुआ मैं दर्द से बिलबिला कर बैठ जाता ! मेरे दस कहते ही दस ग्राम तेल सब्जी में डाल दिया जाता ! ये गिनती मिड डे मील के खाने की मात्रा की थी जो गुरूजी मुझसे खाना बनवाते हुए पढ़वाते ! ये मेरी गणित की कक्षा थी ! मिड डे मील की कैलोरी गणना के साथ स्कूल मेरे लिए भूख, दर्द और गुरूजी का ठहाका था, पर आग पर पकते हुए खाने की गंध मेरा सब दुःख हर लेती !

३.

मैं खाने की लालच में मिड डे मील के राशन की बोरियों को बैलगाड़ी से अपने कंधों पर उठाकर एक कमरे में रखता ! ये मेरी खेल की कक्षा थी ! गुरूजी खेल – खेल में मुझसे सभी बोरियाँ ढुलवा लेते ! इस खेल से मेरी पीठ की हड्डी दुखती पर कंधे और घुटने मजबूत हो गए !

रोज सुबह मेरा स्कूल एक रसोईघर बन जाता ! कूक के नाम पर बाबुओं के फाइलों और रजिस्टरों में साल भर धान की बुआई चलती जिसकी वजह से कुक खाना बनाने मेरे स्कूल में कभी नहीं आते ! मैं और गुरूजी मिल कर खाना पकाते और खाते ! मुझे मिड डे मील का मेनू कैलोरी सहित याद था और पुरानी किताबों को फाड़ के ईंधन तैयार करने में मुझे समय नहीं लगता था ! गुरूजी की मार खाते हुए मैं खाने के पकते ही खाना खाने को तैयार हो जाता !

मिड – डे मील योजना की शुरुआत करने के पीछे एक मकसद ये भी था कि बच्चे भोजन मिलने की वजह से स्कूल जाने में रुचि दिखाएंगे ! भोजन और पढ़ाई को एक साथ जोड़कर देखा गया ! मिड डे मील की व्यवस्था में भोजन और पढ़ाई को एक साथ जोड़कर देखने वाले को सदा मेरा सादर प्रणाम रहेगा ! शिक्षा और भोजन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जिसे सरकार उछालती है और स्कूल में गुरूजी के साथ उसे मैं लूटता हूँ !

स्कूल में दोपहर के भोजन से सामाजिक समरसता भी कायम होती है ! सभी बच्चे बिना किसी भेदभाव के साथ बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं ! बच्चों में स्कूल के चौकीदार कुत्ते के छः बच्चे भी शामिल हैं ! कुत्ते के बच्चे भी हमारे साथ खाते हैं ! यह एक बहुत बड़ा सामाजिक बदलाव है, जिसकी जरूरत भारत को है ! ये मिड डे मील की उपयोगिता है ! जो सामाजिक समरसता को बढावा दे रहा है ! मुझे इस बात का अफ़सोस है कि सरकारी स्कूलों को लेकर आज भी अभिभावकों के मन में अच्छी सकारात्मक सोच नहीं है ! दुःख की बात है जो भारतीय परिवार थोड़े सी भी अच्छी आय वाले हैं, उनके बच्चे प्राइवेट स्कूलों में ही शिक्षा प्राप्त करते हैं !

४.

मिड डे मील स्कीम में लोहे, फोलिक एसिड, जस्त और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों के आपूर्ति की सिर्फ परिकल्पना की जाती है ! मिड डे मील की थाली में इन सब तत्वों की भीड़ नहीं होती ! गुरूजी को साफ़ थाली पसंद है ! मैं अपने हिस्से की छः रुपये अठारह पैसे की अपनी साढ़े चार सौ कैलोरी के भोजन को इतनी लगन से खाता कि मेरे खाने के बाद थाली में कुत्ते तक के लिए चाटने को कुछ नहीं बचता !

मेरी कक्षा में मेरा प्रतिद्वंदी खूंखार था ! उसके बड़े नाख़ून और पैने दांत थे ! मुझे अपना खाना उससे लड़ के जीतना पड़ता था ! जिस दिन मैं खाने में टॉपर बना उस दिन आलू और सोयाबीन की तरी वाली सब्ज़ी और रोटी बनी थी ! उस दिन ये तब की बात है जब मैंने सिर्फ सब्जी खाई थी, वह भी बारह ग्राम प्रोटीन के छः सोया बीन के दाने में से सोयाबीन के दो दाने मेरी मुंह में गए थे ! तभी कुत्ते ने मेरी रोटी पर पंजा मार दिया ! नज़र हटी और दुर्घटना घटी ! एक सौ ग्राम गेहूं की दोनों रोटी कुत्ते की मुंह में थी !

प्राकृतिक रूप से खाना छीनने के लिए कुत्ता मुझसे ज्यादा प्रशिक्षित था ! उसके मुंह में मेरी रोटी फंस गयी थी ! उसकी गर्म आँखों में भूख का एक तूफ़ान था जिसे मैं बहुत देर तक नहीं रोक सकता था ! वो मेरी रोटी किसी भी वक़्त निगल जाता ! मुझे अपना स्टेटस दिख गया था ! मैं कुत्तों से प्यार करता हूं, और मैं कभी भी कुत्तों को चोट नहीं पहुंचा सकता ! हमारे बीच एक सौ ग्राम का खाद्य अनाज था जिसकी मुझे भी बड़ी जरुरत थी ! मुझे बहुत भूख लगी थी ! मुझे अपनी बुद्धि से अपना भोजन कुत्ते से बचा कर आज टॉपर बनना था !

तभी एक बिल्ली वहाँ से गुजरी ! जानवरों से मुझे बहुत प्यार है ! बिल्ली को मैंने अनदेखा कर दिया ! बिल्ली मुझे एक नियमित शिकार की तरह देखती ! बिल्ली को मेरी शिक्षा, स्कूल और सबकुछ जो स्कूल में मेरे साथ होता उसे बस नाटक लगता ! मैंने बिल्ली की आँख में बार बार यही पढ़ा था ! शरीर की भाषा को पढ़ने में हम दोनों के गुरु एक ही थे !

‘ हिम्मत मत हारो – हिम्मत मत हारो ‘ मुझ पर टॉपर होने का सवार भूत बार बार यही कह रहा था ! भूत की ये बात मेरा ध्यान भंग कर रही थी ! मैंने एक पल के लिए अपने भूत को झटक के उतारा ! भूत को ये अच्छा नहीं लगा और टॉपर बनने का भूत कुत्ते पर सवार हो गया ! अब सब परिस्थितियों का खेल था ! कुत्ता काफी बुद्धिमान था ! अधिकांश कुत्तों को पीछे की ओर जाने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जाता है, इसलिए वे तेजी से संतुलन और स्थिरता खो देते हैं ! इस कुत्ते में मौके को देखकर आगे और पीछे जाने की अद्भुत क्षमता थी ! कुत्ते का ध्यान खाने से हटाने के लिए मैं कभी बन्दर तो कभी खरगोश की तरह उछलता रहा ! खाने की गंध ने हम दोनों को बाँध दिया था ! हमारी नज़रें लॉक हो गयी थीं ! मैं उछला तो वो भी उछला ! मुझे खाने पर से कुत्ते का ध्यान हटाने के लिए अजीब, अप्रत्याशित और अराजक नृत्य करना पड़ा ! मैंने बैक अप लिया कुत्ते ने भी बैक अप लिया ! मैं नीचे झुका वो भी नीचे झुका ! इस बिंदु पर अब हम दोनों में से किसी एक को टॉपर होना था !

सौभाग्य से रोटी पर एक मख्खी आ कर बैठ गयी ! कुत्ते की नज़र मख्खी की वजह से एक पल के लिए ही भटकी ! बस मैंने तपाक से अपनी रोटी कुत्ते की मुँह से छीन ली ! कुत्ता हार गया ! मैं जीत गया और टॉपर हो गया !

५.

अपने स्कूल में अगर आप टॉपर नहीं बन पाए थे तो मेरे टॉपर होने की कहानी को पढ़ कर आप को अपने टॉपर नहीं बनने का अब कभी बुरा नहीं लगेगा !

 

इस पोस्ट का अर्चना चावजी द्वारा तैयार किया गया उनकी ही आवाज़ में पॉडकास्ट  !  

 

पॉडकास्ट का साउंड क्लाउड लिंक  –

हैश टैग

हैश टैग

 

जिस चीज़ पर मेरा विश्वास होता, उसके लिए मैं खड़ा नहीं हो पाता ! सोशल मीडिया पर अपनी रीढ़ की हड्डी से निराश हो कर मैं एक दिन वर्चुअल दुनिया से बाहर निकल गया !

सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर मेरी रीढ़ की हड्डी मेरा साथ छोड़ चुकी थी ! दिन भर अलग अलग प्लेटफॉर्म्स के हर वॉल के हर पोस्ट पर बिन पेंदी के लोटे की तरह मैं इधर उधर लुढ़कता रहता और सोशल मीडिया पर दूसरों के विचारों, चित्रों, और उनके जीवन की घटनाओं आदि को बिना सोचे समझे लाइक करता फिरता ! पल में माशा, पल में तोला और जहाँ जरुरत न हो मैंने वहां भी मुँह खोला ! अच्छे बुरे हर विचार को कब मेरा समर्थन मिल जाता मुझे पता भी नहीं चलता था ! घूम घूम कर मेरी गर्दन सबकी हाँ में हाँ मिला देती ! मेरे पास न अपना कोई विचार था न कोई विषय ! मेरी गर्दन मेरे वश में नहीं रह गयी थी ! मेरी गर्दन हर बात पर हर जगह हिलती रहती और चारों ओर घूमने लगी थी ! लुंज – पुंज होती रीढ़ की हड्डी की वजह से गर्दन की कमांड और कंट्रोल की मेरी दोनों ताक़तें कमज़ोर हो गयी थी ! रीढ़ की हड्डी के बिना मैं लगातार सब पर फ़ब्तियां कसता और सबकी छोटी – मोटी बातों का बेहूदा जवाब देता ! जहाँ रीढ़ की हड्डी के साथ टिक कर खड़ा होना पड़ता वहां मेरा पैर किसी साबुन के विज्ञापन से टकरा कर फिसल जाता और मैं भाग जाता ! कई बार ऐसा होता कि मेरा मन लोगों को मुँहतोड़ जवाब देने का करता, मगर अपनी ढीली रीढ़ की हड्डी की वजह से कुछ कह नहीं पाता ! बिना रीढ़ की हड्डी के मैं सोशल मीडिया पर हर एप्लिकेशन का आनंद लेने लगा था ! इसी वज़ह से मेरे ऐसे फ्रेंड्स बढ़ने लगे थे जिन्हे मैं जानता तक नहीं था ! मैं इतना अ – सामाजिक हो गया था कि बिना रीढ़ की हड्डी के खुद को सामाजिक स्थितियों में डाल देता !  मेरी रीढ़ में अनचाहे व्हाट्सएप को अनइंस्टॉल करने की ताक़त तक नहीं बची थी ! पारस्परिक संबंध के लिए दिन में कई बार लाइव हो कर भी जीवन के स्पर्श की चाह में मैं रीढ़हीन मरा – मरा सा भटकता रहता !

तीन कारणों से मुझे अपनी गर्दन को कसने की आवश्यकता हो गयी थी ! सोशल मिडिया पर गर्दन के चारों ओर घूम जाने की वजह से मुझे इस बात का डर हो गया था कि कहीं कोई मेरा चक्रवर्ती गला काट न ले ! मुझे अपनी गर्दन को स्थिर रखने के लिए उसे बांधना जरुरी हो गया था ! दूसरा कारण ये था कि मैं बिन पेंदे का लोटा बनकर लुढ़क लुढ़क के पिचकने लगा था ! मुझे अपनी   पात्रता की शेप बचानी थी ! गर्दन को बाँधने का तीसरा कारण ये था कि गर्दन सीधी रहे ताकि मैं व्हाइट कॉलर पहन सकूँ ! मेडिकल साइंस ने भले ही कितनी तरक्की कर ली हो उसके पास उन रहस्यमयी और शिथिल कर देने वाले मर्ज़ का इलाज नहीं है, जिसने मनुष्य की सोशल मिडिया की भूख को अपनी गिरफ्त में ले लिया है !

अलग – अलग जीवों की अलग – अलग प्रकार के गर्दन और रीढ़ की समस्याएं हैं ! अपनी इसी रीढ़ की समस्या का हल ढूंढने के लिए वर्चुअल दुनिया से बाहर भटकते भटकते मुझे एक कुत्ता दिखा ! कुत्ते की गर्दन में पट्टा था ! पट्टे पर ध्यान जाते ही मुझे ज्ञान रूपी कुत्ता काट गया ! सहसा मुझे ये बात समझ में आ गयी कि पृथ्वी जैसे पेशेवर परिवेश में हमें गर्दन के ऊपर को छोड़कर अपने शरीर के किसी अन्य हिस्से पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है ! मुझे लगा अगर मैं  भी अपने सभी पट्टों को जोड़ कर अपनी गर्दन में पहन लूँ तो शायद मेरी रीढ़ की हड्डी सीधी हो जाए ! नाम, फोन नंबर, मेल आईडी और सेल्फी जैसे पट्टों को जोड़ कर मैंने नंबर साइन जैसा हैश टैग बना दिया और बेहतर दुनिया के लिए मैंने अपनी गर्दन में हैश टैग पहन लिया ! अपना नाम, फोन नंबर, ई मेल आई डी, और एक सेल्फ़ी में मेरी गर्दन चारों तरफ से फँस चुकी थी ! अपनी गर्दन को हैश टैग के चौकोर में फँसाते ही, मेरी रीढ़ की हड्डी तन कर कड़क हो गयी !

गले में हैश टैग के लगते ही मैं पूरी तरह एक्शन में आ गया ! सबसे पहले हैश टैग के अंदर और हैश टैग के बाहर से सेल्फ़ी खिंचवायी ! सोशल मिडिया में अपलोड किया ! एक आदमी के गले में चौकोर चार खानों वाला पट्टा सबको लुभा गया ! हैश टैग के लगते ही मैं बड़ी आसानी से टैग होने लगा ! हॉट – डॉट लड़कियाँ मुझे टैग करने लगीं ! देखा देखी सबने अपनी गर्दन हैश टैग में फंसा लिया ! सोशल मीडिया पर सबकी रीढ़ की हड्डी ढीली हो गयी थी ! जिन्होंने अपनी गर्दन में हैश टैग नहीं फंसाया वो पास की गर्दन में फंसे हुए हैश टैग में खुद फंस गए ! हैश टैग पहने जैसे ही कोई दो व्यक्ति आप को घेरेंगे आपकी गर्दन हैश टैग में खुद व खुद फंस जाएगी ! लोग फंसते चले गए और हैश टैग का मैट बन गया ! सोशल मीडिया के लॉगरिथम से एक हो कर मैं तत्क्षण वायरल हो गया ! विचित्र समाज का ये विद्रूप बिम्ब था ! किसी साइंस फिक्शन के व्यंग्य रूप सा मेरा यह नया रूप था ! अब मैं हैश टैग था ! दुनिया का सबसे ताक़तवर प्रतीक ! मेरे पास सोशल मिडिया के आर पार का रोड मैप आ गया था ! फ़ायर ब्रांड वाली शक्ति मेरे पास आ गयी ! मेरी रीढ़ की हड्डी इस्पात की तरह स्थिर और कठोर हो गयी ! मैं सोशल मीडिया पर किसी को भी भष्म कर सकता था और किसी की भी उत्पत्ति मेरे हाथ में थी ! देखते देखते मैं काल वायरल हैश टैग देव हो गया ! मुझे देख कर पडोसी का कुत्ता भौंकने लगा ! शायद उसे भी अपने चमड़े के कॉलर से आज़ादी चाहिए थी ! मैंने उसे भी टैग कर दिया ! सोशल मिडिया पर इसलिए कुत्तों से जुडी समस्याएँ जल्द वायरल हो जाती हैं !

हैश टैग कॉलर को मनुष्य शर्ट, ब्लाउज, जैकेट या कोट की गर्दन के चारों तरफ लगा के मेरी तरह श्री हैश टैग हो सकते हैं ! आपकी चक्रवर्ती गर्दन हैश टैग से एकाग्रचित्त हो सकती है ! अपनी रीढ़ की हड्डी सीधी कर के जिसे किसी दुसरे व्यक्ति की गर्दन का समर्थन करना हो वो हैश टैग पहन सकता है ! हिजाब के साथ भी हैश टैग पहना जा सकता है ! यदि लंबे बाल हैं, तो बाल गर्दन से बाहर होना चाहिए ! वर्ल्ड वाइड वेब पर हैश टैग अब आधुनिक फैशन का पोशाक है ! आईने के बाद हैश टैग ही मनुष्य को अपना चेहरा दिखा सका है !

हैश टैग एक सामाजिक चिकित्सा उपकरण है ! हैश टैग सरवाइकल कॉलर नहीं, हैश टैग सरवाइवल कॉलर है ! गले में हैश टैग की वजह से अब मेरी अलग वेशभूषा है इसलिए अब मेरी अलग जीवनशैली होगी ! युवा जीवनशैली ! जनता सबकुछ चुनती है ! जनता ने मुझे अपना प्रतीक चुना है ! समाज में मैं उनका सबसे ज्यादा साथ दूँगा जो नयी बात कहेंगे, ऐसी बातें जो आज समाज के लोगों को पसंद आए ! आज हैश टैग के माध्यम से सरकार जनता को नई योजनाओं के बारे में जानकारी देती है और एक आम आदमी मुझ जैसे छोटे से हैश टैग के जरिए एक छोटी सी मुहिम को क्रांति बना देने की शक्ति रखता है ! सोशल मीडिया पर हर व्यक्ति अपने विचारों को प्रभावी बनाने के लिए हैशटैग का प्रयोग कर सकता है ! जो मेरे साथ रहेंगे उनको कभी इमेज मेकओवर की जरूरत नहीं पड़ेगी ! जो पकडे हैश टैग का हाथ , सोशल मिडिया उसके साथ !

वार्निंग : जिस हैशटैग के बारे में आपको पता न हो, उस पर प्रतिक्रिया न दें ! हर टेक्नोलॉजी की तरह इसका भी एक नकारात्मक पहलू है ! कई बार शरारती तत्व गलत किस्म के समाज – विरोधी हैशटैग शुरू कर देते हैं ! यदि आप उन्हें अच्छे से समझे बिना उसके बारे में ट्वीट करने लगेंगे या सोशल मिडिया के दुसरे प्लेटफार्म पर ले कर जायेंगे तो जाने – अनजाने में आप उनके समाज -विरोधी कार्य में शामिल हो जाएँगे !

पवित्र चप्पल

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पवित्र चप्पल

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चप्पल को नहीं जानना ही सारे दुःखों का मूल कारण है ! वेदों में लिखा है चप्पल को जानने से आदमी सारे बन्धनों से मुक्त हो जाता है ! अगर किसी की दिलचस्पी आजाद भारत के इतिहास को बारीकी से जानने की है, तो उसे पहले भारतीय चप्पल को जानना होगा ! लेकिन, दुर्भाग्य से चप्पल को इस दृष्टि से देखना बंद कर दिया गया है !

“धाँय…धाँय…धाँय…” ! बंदूक से तीन गोलियाँ निकलीं ! गोलियों की आवाज के बाद अगली आवाज थी – ‘हे…राम’ ! उसके बाद क्या हुआ मुझे कुछ याद नहीं ! मैं अभागी चप्पल बापू के पाँव से पता नहीं कब सदा के लिए अलग हो गयी ! मैं राष्ट्रपिता द्वारा पहने जाने के बाद भी वीआईपी नहीं हो पायी हूँ ! आज देश में चप्पल की हालत उनके सिद्धांतों जैसी हल्की और सार्वजनिक हो गयी है ! मुझे जो चाहे उतार ले, किसी पर भी उछाल ले, नीलामी में बेच दे या किसी को भी जड़ दे !

बिरला हाउस के हरे घास पर पड़े – पड़े मुझे लगा किसी गहरी नींद से सोकर उठी हूँ ! कुछ ठीक से याद नहीं आ रहा था ! मेरा शरीर सामने पड़ा था और मैं उससे बाहर ! मुझे सिर्फ इतना याद है मेरे धारक का नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था जिसने मुझे कुछ भी अदा करने का वचन नहीं दिया था ! मैं बापू का वो चप्पल हूँ जो तीस जनवरी को बापू के पाँव से आत्मा की तरह बिछड़ गयी थी !

हाँ, आज मैं चप्पल के वेश में संत नहीं हूँ, क्योंकि आज किसी संत के पाँव में चप्पल नहीं है ! हाँ, मैं चप्पल के वेश में राजनेता भी नहीं हूँ, किसी राजनेता के पाँव में चप्पल नहीं है ! मुझे संत कहना यदि संभव भी हो तो अभी उसका समय बहुत दूर है ! शायद मुझे समाज की कुरीतियों में और घिसना है ! संत के पॉव में लम्बे समय तक रहने के बाद भी मैं किसी भी रूप या आकार में अपने आपको संत अनुभव नहीं करती ! स्लीपर, सैंडल, फ्लोटर, बैली, हाईहील, अब मेरे कई नाम है !

जीने के लिए कई बार नीलाम हो कर, कई बार बदनाम हो कर, वेश बदल कर भी मैं समाज की सेवा कर रही हूँ ! दुःख बस इस बात का है कि बापू की हत्या के बाद देश में चप्पल की किसी ने सुध नहीं ली ! बापू के तीनो बंदरों ने भी अपने पुतले में मुझे अपने साथ स्थान नहीं दिया ! वो चाहते तो बुरा न देखो. बुरा न बोलो, बुरा न सोचो के साथ बुरा न पहनो कहती हुई मैं गाँधी जी का चौथा बंदर बन सकती थी ! पर आज भी मैं अश्पृश्य हूँ !

हा ! बापू तुम कहाँ हो ? बापू भारतीय नोट में तुम्हारे पाँव क्यों नहीं दिखते ? तुम्हारे पाँव के बहाने मैं तुक्छ चप्पल दिख जाती तो देश में चप्पलों की गरीबी दूर हो जाती ! चप्पल गरीब नहीं होते तो तो उन्हें पहनने वाले पाँव भी गरीब नहीं रहते ! ‘ सादा जीवन उच्च विचार ‘ चप्पल का यही साफ़्ट कार्नर आज सबसे ज्यादा चुभता है ! ‘ अच्छी गुणवत्ता और सस्ती कीमत ‘ ये अब मेरी पहचान नहीं, आज गरीबी को दी हुई गाली है ! अपने अतीत की ठोकरों से सबक लेकर मैंने यही जाना है !

मेरे पिता एक जूता थे इसलिए मैंने अपने जीवन में कभी कोई जिम्मेदारी नहीं ली ! स्वतंत्रता का अनुभव करने के लिए यात्रा जरुरी है, यह मैं बचपन में ही जान गयी थी ! हमेशा घूमना – फिरना ही मेरा जीवन रहा ! चप्पल के बहाने देश की गरीबी की आत्मकथा लिखने का मेरा आशय नहीं है ! मैं बस एक चप्पल हूँ और बापू की हत्या के बाद गरीब के पैर में फँस गयी हूँ ! देश और बापू की आत्मा की तरह मुझे भी गरीबी से आज़ादी चाहिए ! भारत में गरीबी अक्सर चप्पल से चल के आती है ! चप्पल की जनसँख्या गरीबी का परिणाम है !

बापू के चश्मा के साथ सब अच्छा हुआ ! गोली लगने के बाद बापू का चश्मा भी हरे घास पर वहीँ गिरा था जहाँ मैं गिरी थी ! चश्मे को चाहे फिर बापू की नज़र न मिली हो पर उसकी रोजी रोटी पर किसी की नज़र नहीं लगी ! बापू की हत्या के बाद अपनी पहचान के लिए मेरी तरह चश्मा विदेशों में नीलाम हो कर भी स्वच्छता अभियान को पा गया है ! सब जानते हैं स्वछता अभियान के पोस्टर में बापू का चश्मा अपना पेट पाल रहा है ! गन्दगी की तरह चश्मे को मुझ चप्पल की गरीबी भी नहीं दिख रही है ! बापू तुम्हारे जाने के इतने सालों बाद भी मैं क्यों भटक रही हूँ और मेरी हालत पर व्यंग्यकार क्यों ताने मार रहे हैं ?

चप्पल एक शक्ति है, एक मार्ग है, एक धारा है, एक एहसास है, एक विश्वास है, जिसका निश्चित स्वरुप हमारे पैरों में है ! चप्पल के रूप और स्वरूप को लेकर यही सत्य है ! चप्पल एक विचार है जिसे जिया जा सकता है, चप्पल एक अनुशासन है जिसे माना जा सकता है और जिसे जीवन के कर्मों के अनुसार किसी और बदन पर उतारा भी जा सकता है ! चप्पल को शिक्षित होना चाहिए क्योंकि शिक्षा के अभाव में एक स्वस्थ पैर का चप्पल होना असंभव है !

पैरों में रहकर भटकते हुए भी मैंने रावण, चाणक्य, दादाभाई नौरोजी, विवेकानन्द, गोखले, तिलक के भाषणों और लेखों को पढ़ा है ! साथ ही मैंने भारत और कुछ अन्य प्रमुख देशों जैसे इंग्लैंड, फ्रांस, अमेरिका और रूस के प्राचीन और आधुनिक इतिहास को भी पढ़ा है ! इनके अतिरिक्त मैंने समाजवाद और माक्र्सवाद के सिद्धान्तों का भी अध्ययन किया है, इसलिए मैं ये कह सकती हूँ कि हर चप्पल कुछ कहती है ! चप्पल का अर्थ है – किसी भी प्राणी को तन, मन, कर्म, वचन और वाणी से कोई नुकसान न पहुँचाना !

भारत देश में चप्पल का जड़ गहरा है ! क्या आप मेरे एक सवाल का जवाब दे सकते हैं ? शरीर प्रशासित पैर में और भारत प्रशासित कश्मीर में क्या समानता है ? मेरा उत्तर है – अपने पैरों के साथ बर्बरता ! चप्पल की तरह शरीर में भी बाहर की तरफ चमड़े लगे हैं और शायद अंदर रबड़ की आत्माएं हैं ! इसीलिए देश में पैरों को डरा कर रोकने के लिए देश की आत्मा को काट के रबड़ की गोली बनती है ! पैरों के साथ बर्बरता से अब शरीर में आत्मायें भी नहीं बचीं इसीलिए रबड़ की गोली भी नहीं रही और अब पत्थर बरस रहे हैं ! चप्पल के बिना देश के पैर की छब्बीस हड्डियों में सांप्रदायिक तनाव कौन फैला रहा है ? क्या अपने देश समाज का आकार चप्पल से बड़ा नहीं है ?

मैं चप्पल के रूप में भी दिल और समर्पण से भरी हुई हूँ ! अपने देश की शिक्षा, गरीबी, हेल्थकेयर, न्याय, कानून और व्यवस्था जैसे कई पथरीले रास्तों वाले किसी भी लम्बी यात्रा पर चलने के लिए और कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ ! पर मैं देश के घोटालों को पचाने में सक्षम नहीं हूँ ! चप्पल उतना ही पचा सकता है जितना पैर खा सकता है !

जिस तरह पवित्र स्थलों पर जूते पहनकर जाना सही नहीं है, उसी तरह लोग घर के भीतर चप्पल ले जाना सही नहीं समझते ! कुछ लोग इसके पीछे साफ – सफाई और स्वच्छता का तर्क भी देते हैं, ताकि बाहर की गंदगी घर के भीतर ना पहुंच सके ! मेरा मानना है कि जनता के विचारों को मोड़ देने और सक्रिय करने में सबसे अधिक भूमिका मैंने और मेरे साथ दुसरे चप्पलों ने ही निभायी है ! मुझे दुःख है आज भारत के तीस प्रतिशत पैर चप्पल से भी बहार हैं ! पवित्र चप्पल के पाँव तुम एक हो जाओ ! खाली पैर वालों का देवता भी नहीं सुनते शोर मचाने के लिए कम से कम चप्पल पहनना जरुरी है !

लाल बत्ती नहीं अब ‘एल’ बोर्ड का कोहिनूर लगेगा

जहाँ भूमि के नियमों का पालन नहीं होता वहाँ ट्रैफिक के नियमों का क्या होगा ?

भारतीय सड़क मतलब स्ट्रीट फूड, शॉपिंग और पार्किंग का जागृत अड्डा ! भारतीय सड़कें अर्थात व्यावसायिक स्थान ! हमारे देश में अच्छी सड़क बाज़ार के लिए अच्छा कमर्शियल लोकेशन है ! बचपन के हैप्पी बर्थडे पार्टी से लेकर सारे त्योहार, जवानी का हुड़दंग और शादी ! आंदोलन, जुलुस, भाषण के पंडाल, से लेकर अंतिम यात्रा और उसके भोज तक का सफ़र सब सड़क पर ! माता की चौकी और देवताओं का पलंग हम सब सड़क पर लगा लेते हैं ! सड़क पर रोज़ का आना जाना अब योग का एक ऐसा आसन हो गया है जिसे बाबा रामदेव द्वारा बेचा जाना बचा है ! सड़क की इसी बाज़ारू संस्कृति के कीचड़ में खिला कमल है लालबत्ती वाली कार ! सड़क की भीड़ सिर्फ़ लाल बत्ती को रास्ता देने के लिए तैयार है बाकी सबको सड़क पर दंगल लड़ के जीतना होता है फिर जाना होता है ! जिस भूमि पर ट्रैफिक लाइट और डिस्को लाइट में अब भी फर्क करना बचा है वहाँ लाल बत्ती ही एक नियम है जिसका सब पालन करते हैं !

जहाँ पैदल चलने वालों के लिए कोई फुटपाथ नहीं वहाँ भारतीय सड़कों की कुछ विशेषताएँ हैं ! भारतीय सड़कों पर हम भारतीय ड्राइविंग कम कुश्ती ज्यादा करते हैं ! हमारे यातायात व्यवहार में गाली और हॉर्न देना शामिल है ! गाडी चलाते हुए भड़कना – फड़कना पड़ता है ! भारतीय सड़कों पर अक्सर आपको अपना रास्ता निकालने के लिए मौखिक रूप से सामने वाले को धमकाना पड़ता है ! मारपीट के लिए तैयार रहना पड़ता है इसीलिए लाल बत्ती का लगाना जरुरी होता है ! लाल बत्ती मतलब भारतीय सड़क पर अश्वमेध का घोड़ा जिसे आप पकड़ नहीं सकते, रोक नहीं सकते, किसी कीमत पर बाँध नहीं सकते ! लाल बत्ती के आते ही सब समर्पण कर देते हैं ! मानवतावादी, बुद्धिवादी, एक्टिविस्ट, चिंतक, लेखक, कवि, गाड़ी चलाते हुए सभी ऐसा ही करते हैं ! ड्राइविंग करते समय भारतीय अगर रियर – व्यू मिरर का उपयोग करने लगें तो उनको अपनी विनम्रता उसमे जरूर दिख जाएगी !

लाल बत्ती के कल्चर की तरह लाल बत्ती के नियम बहुत अलग हैं ! लाल बत्ती पर कोई कानून लागू नहीं हैं ! कोई लेन प्रणाली की बंदिश नहीं, कोई यातायात नियंत्रण नहीं, कोई अंडरपास या ओवरहेड क्रॉसिंग कुछ भी नहीं ! सभी गाड़ियों से आप चिपक सकते हैं पर लाल बत्ती से चिपक सकें इतना फेविकोल किसी की छाती में नहीं ! लाल बत्ती देख कर हॉर्न भी खामोश हो जाता है !

एक मई से लाल बत्ती का इस्तेमाल बंद करने के फैसले के बाद भारतीयों को लाल बत्ती निकाल के अपनी – अपनी गाडी में ‘एल’ बोर्ड लगा लेना चाहिए ! ट्रैफिक सिग्नल का पालन करना, सीट बेल्ट पहनना, काले काँच की खिड़कियां न लगाना, ड्राइविंग करते समय फोन पर बात न करना और अन्य सभी बुनियादी नियमों का पालन करना लाल बत्ती की तरह ही ‘एल’ बोर्ड पर लागु नहीं होता ! ‘एल’ बोर्ड का पावर लाल बत्ती से कम नहीं ! ‘एल’ बोर्ड ड्राइवर की क्षमता का प्रतीक है यह दर्शाता है कि कार चलाने वाला व्यक्ति एक लर्नर है और अन्य ड्राइवरों को लाल बत्ती की गाडी की तरह उसका ध्यान रखना चाहिए ! इसका मतलब है चालक सीखने के चरण में है और लाल बत्ती की तरह सड़क पर उसका सात खून माफ़ है !

जब गाडी का ब्रेक खराब होता है तो मैं हॉर्न तेज़ करवा लेता हूँ ! हर भारतीय खास है, हर भारतीय वीआईपी है ! हम सड़क के मालिक हैं ! गाड़ियों में लाल बत्ती नहीं अब ‘एल’ बोर्ड का कोहिनूर लगेगा !

राम क्षण

मादक ध्वनि संकेत सबको आकर्षित कर रहा था ! कवि ने देखा मादा नर के कलगी को बार – बार चूम रही थी ! प्रेम में दोनों के पूंछ पेट गर्दन सब एक हो गए ! साँस साँस में एक हो कर दोनों पल भर में दो बदन एक प्राण हो गए ! ये प्रेम की पराकाष्ठा थी ! यही प्रेम का मूक क्षण था ! भक्ति प्रेम और समर्पण का जादुई क्षण भी यही था ! क्रौंच के बहाने प्रकृति प्रेम में लीन थी ! सृष्टि में यही राम क्षण था ! धरती पर प्रेम का ये रूप कवि अपनी नंगी आँखों से देख रहा था और अवाक था ! उसने देखा टहनी जिस पर प्रेमी जोड़ा बैठा था, पेड़ जिसकी वो टहनी थी, आकाश जिसके नीचे वो पेड़ था और कवि स्वयं प्रेम प्रकाश में नहा रहे थे और प्रेमी जोड़े के साथ राम में रम के राममय हो गए थे ! इस क्षण सा पवित्र कुछ भी नहीं था !

सहसा एक तीर नर क्रौंच की छाती चीर गया और सूखे पत्ते की तरह वो धरती पर आ गिरा ! नर अपने ही खून की धार में भीग रहा था ! असहाय प्यासी आँखें मादा को देख रही थीं ! रक्तरंजित क्रौंच पीड़ा से छटपटा रहा था ! दर्द और दुःख अश्रु धार में बहने लगे ! तीर नर को आर पार गाँथ चूका था ! रोती हुई मादा क्रौंच भयानक विलाप करने लगी ! नर ने दर्द के नशे में धीरे धीरे ऑंखें मूँद ली ! छटपटाते क्रौंच के आर्तनाद से द्रवित होकर कवि रोने लगा ! अपने प्रेमी नर के बिछोह में मादा ने अपना सिर पटक – पटकर कर प्राण त्याग दिया ! वियोग की दुःख से उसकी छाती फट गयी ! करुणा जाग उठी ! अविरल अश्रु की धार से सब ओझल हो गया था ! कीड़े-मकोड़े, छोटे सांप, घोंघे, सीपी, सारस के सब भोजन क्रौंच वध के साथ ही दुःख में मर गए ! जब भी किसी को किसी से प्रेम हो जाता है तो उसके बिना फिर जीना आज भी मुश्किल हो जाता है ! खेती की कम होती भूमि, सिमटते जंगल, कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग और मानवों की बढ़ती आबादी तो बस सारस के गायब होने का एक कारण होंगे, प्रेम के विलाप में वाल्मीकि के श्राप के शब्द धान के खेत, दलदल, तालाब, झील, और हवा में आज भी तैर रहे हैं !

सावधान, मैं मूर्ख हूँ !

 

 Illustration : Anirban Bora

काला हास्य / Illustration : Anirban Bora

बिना किसी कारण के ख़ुशी से नाचता हुआ देख कर मुझे पुलिस पकड़ कर सवाल घर में ले गयी और पूछताछ करने लगी ! छान – बीन से यह बात सामने आई कि मैं मूर्ख हूँ ! पुलिस का कहना है कि यह अपराध है और मूर्खता साबित होने पर सात वर्ष तक की सज़ा हो सकती है.! मैंने पूछा ‘ पांच वर्ष की सजा क्या कम है जो हमें चुनाव जैसी मूर्खता के बाद मिलती है, फिर मुझे सात वर्ष की अलग से सज़ा क्यों हो ?’ छोटा मूर्ख बड़ी बात कह कर पुलिस मुझ पर हंसने लगी !

मेरी गिरफ़्तारी का पता लगते ही मूर्खता आयोग ने पुलिस से मेरी मूर्खता के मामले की रिपोर्ट मांगी ! भारतीय पुलिस ने मेरी मूर्खता को परखने का डेमॉन्सट्रेशन रखा और मुझे एक मशीन से जोड़ दिया ! डेमॉन्सट्रेशन के दौरान अलग – अलग बटन दबाने पर भी मशीन से मूर्खता की ही पर्ची निकली ! यह देख कर पुलिस मुझे ईवीएम मूर्ख कहने लगी !

मैंने पुलिस से कहा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन जिस पर हम अपने वोट देते हैं, मैं वो नहीं हूँ ! मैं एक वोटर हूँ, वोट मशीन नहीं ! मैं एक नागरिक हूँ ! मैं मूर्ख हो सकता हूँ पर ईवीएम नहीं ! ‘क्या मेरे साथ छेड़छाड़ हो सकती है ?’ मूर्खता आयोग को मेल लिख कर पुलिस ने पूछा ! ‘छेड़छाड़ किया जा सकता है, इसलिए जब तक सिद्ध न हो जाए कि मैं मूर्ख हूँ मुझे उच्च सुरक्षा में रखा जाए ‘ जवाब मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया !

प्रशासन का अर्थ श्रेष्ठ विधि से शासन करना है ! मानव विकास ही इसका परम लक्ष्य है इसलिए मेरी प्रशासनिक सेवा शुरू हो गयी ! मुझे पांच मीटर के केबल से जोड़ दिया गया ! पुलिस की देख – रेख में अब मूर्खता आयोग के अलावा कोई भी मुझ तक नहीं पहुंच सकता था !

मैं जानता था कि मैं मूर्ख हूँ, पर इतना बड़ा मूर्ख हूँ कि मुझे क़ैद कर लिया जाए ये नहीं पता था ! अपनी इस दुर्लभ मूर्खता तक पहुँचने के लिए लाखों लोगों की तरह मैंने भी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया !

शिक्षा, लोकतंत्र, धर्म, जाति व्यवस्था, जैसे कई अलग – अलग क्षेत्रों से किये गए सवालों पर दिए गए मेरी मूर्खतापूर्ण उत्तर में भी मूर्खता आयोग को चुनावों को प्रभावित करने की शक्ति दिखाई दे गयी ! मेरी मूर्खता सिद्ध करने के लिए मेरा सीक्रेट सर्च वारंट निकाल दिया गया ! मेरी मूर्खता के बहाने वो मेरे फोन का स्मार्टनेस चेक करने लगे ! ‘आप से ज्यादा आप का फोन स्मार्ट है’ उन्होंने कहा ! मेरी अब तक की सारी वर्चुअल रियलिटी सच होने लगी ! स्मार्ट सिटी के स्मार्ट मूर्ख की स्मार्ट मूर्खता एक ही पासवर्ड से बाहर आ गयी !

मेरी ही तरह स्मार्ट होने के लिए कई लड़की – लड़के इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में घुसते हैं, डॉक्टर बनते है, लेखक, व्यापारी, शिक्षक, कलाकार ,वैज्ञानिक और अभिनेता बन कर अभिनय करते हैं और नेता बन जाते हैं और आखिरकार मूर्ख ही कहलाते हैं ! मूर्खता मूल्य पैदा करती है, विचार नहीं ! मेरी तरह भारत में अनेकता और एकता के आयाम में मूर्खता भी जोड़ के देखिये आपको देश ज्यादा एक लगेगा ! धर्म, भाषा और रीति – रिवाजों की विविधता के साथ हमारी मूर्खता में भी एक अद्भुत एकता है जहाँ सामूहिक बलत्कार अब नया हथियार है !

मुझे देखने कॉर्नफ्लेक्स खाता हुआ डॉक्टरों का एक दल आया ! ‘ जब मछली मरती है तो उसका सिर सबसे पहले गलना शुरू होता है और इसीलिए बदबू भी सबसे पहले वहीं से आती है ! ऑपरेशन करके हमें आप के अक्ल की तलाशी लेनी है ! ऑपरेशन जटिल है ! जीना है तो तकलीफ भी झेलनी होगी ! आप सिर्फ अपने कैलोरी पर ध्यान दें, चाहें तो किसी भी सरकारी परियोजना के बारे में बात करें ! पर विचार न करें ! विचार करने से नींद आ जाती है और नींद आपकी मूर्खता में खलल डाल सकती है ! एक हाथ ही दूसरे हाथ को धोता है !’ बारी बारी से सभी डॉक्टरों ने मुझसे ये बातें कहीं !

मुझे हल्का करने के लिए डॉक्टरों ने मेरे पेट में गैस भर दिया ! धीरे – धीरे मेरी आँख बंद होने लगी और मैं उड़ने लगा ! महँगी सब्ज़ी मंडी और बंद बूचड़खाने पर से उड़ता हुआ मैं समशान और कब्रिस्तान के ऊपर पहुँच गया ! सुनसान गली पार करती हुई एक सहमी सी लड़की के ऊपर से उड़ने लगा, खाली खेल के मैदान और दुर्घटनाग्रस्त रेलगाड़ियों के ऊपर से उड़ता हुआ मैं देश भर में फैले ड्रोन कैमरे की तरह सरकारी हवाई जहाज़ के साथ बादलों में तैर रहा था ! सूखी कोसी और मैली गंगा मुझे अपने घर बुला रही थी ! अपनी मूर्खता के साथ उड़ते – उड़ते मैं इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री से भी ऊपर उठ गया ! डिब्बाबंद मांस की तरह उड़ता हुआ देख कर फौजियों ने मुझे लपक कर नीचे उतार दिया ! मैं अस्पताल में बिस्तर पर लेटा था और सामने टीवी स्क्रीन को काला कर के कोई सरकार को आइना दिखा रहा था या मुझे मूर्ख बना रहा था, मुझे कुछ याद नहीं ! रिमोट कंट्रोल्ड चार रोबोट कार्टूनिस्टों ने मेरे पेट से गैस निकाल लिया !

क्या आपके पास पतंग उड़ाने का लाइसेंस है ? उन्होंने मुझसे पूछा ! ‘ नहीं तो ‘ मैंने चौंकते हुए कहा ! ‘ पतंग उड़ाने के लिए भी लाइसेंस की जरुरत पड़ती है ?’ मेरा सवाल सुन कर सब गोल बंद हो कर फुसफुसाने लगे ! काफी देर बाद सब बिखर के इधर उधर फ़ैल गए और एक महत्वपूर्ण सा लगने वाला आदमी मेरे पास आया और मुझे इन्टरनेट से जोड़ कर मुक्त कर गया ! ‘राइट टू इन्फॉर्मेशन एक्ट के तहत आप अपने घर जा सकते हैं ‘ ये कहता हुआ वो हॉस्पिटल से किसी विज्ञापन की तरह गायब हो गया !

ज्यादातर दफ्तरों में मशीनें, कंप्यूटर और आदमी एक जैसे होते हैं ! मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है फिर भी अपनी जांच के नतीजों में वो मुझ जैसे अपने मूर्ख नागरिक को पहचान न सके ! अपनी पूरी ताकत और साहस के साथ मैं हँसने लगा ! मेरे साथ सब हंसने लगे ! अपना हेड फ़ोन कान में डाल कर इंटरनेट की अच्छी स्पीड की ख़ुशी में नाचते – नाचते मैं घर लौट आया !

मांस पेशी

शेर और गाय के सम्बन्ध जब से खट्टे हुए, जंगल की राजनीती से सड़ांध की बू आने लगी ! जंगल के नगर निगम ने शेरों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी ! सुबह शेर को जब मांस की जगह मांस बंदी का नोटिस मिला तो वो खिसियानी बिल्ली हो गया ! मवेशी वध विरोधी आंदोलन के बंदरों ने पेड़ पर से शेर को खंभा नोचते हुए देखा ! शेर पहले ही जीवन संकट के दौर से गुज़र रहे थे, अब उन्हें खाने के भी लाले पड़ गए ! शेरों को पेट भरने के लिए भैंसे का मांस दिया जाता था जिससे तबेले में असहिष्णुता बढ़ गई और भैंस देशद्रोही हो गए ! बदली परिस्थितियों में ज़िंदा रहने के लिए शेरों को बकरे के मांस से ही काम चलाना पड़ रहा है ! मांस की उपलब्धता न होने की वजह से शेरों और शावकों को मुर्गे का मांस दिया जा रहा है ! पहले तो मौसम और बीमारी शेर के लिए ख़तरा बने और अब उनके राशन पर ही हमला हो गया !

‘ बूचड़खानों पर नहीं हमारी किस्मत पर ताला लग गया है ! कहीं मर ना जाऊँ ‘ ये कह कर शक्तिशाली चीता सुबक सुबक कर रोने लगा ! चीता को रोते हुए देख कर सब माँसाहारी भावुक हो गए ! राजधानी में मांस समस्या पर चर्चा के लिए तत्काल कार्यक्रम रखा गया ! सभी जानवर आये ! कार्यक्रम में फलाहार देख कर मांसाहारी निराश हो गए ! आम, खीरा, ककड़ी, लीची, कटहल, खरबूजा, तरबूजा और अंगूर पसरे रह गए ! स्वागत भाषण में सिंह के मुँह से उत्तर प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, हरिद्वार, जयपुर जंगल का नाम सुनते ही पशु मांस – मांस करने लगे ! ‘ प्रदेश में अगर मांस की किल्लत हुई तो हम दिल्ली से मटन मंगवाएंगे ! ‘ सिंह के इस घोषणा से सब शांत हुए !

‘ हम भी इंसानों की तरह जैसा देश वैसा भेस बनाने की काबिलियत रखते हैं ‘ सिंह की इस बात से सबके तोते उड़ गए ! ‘ चिकन खा कर थक गयी हूँ ! मांस के बारे में ठंडे दिमाग से बहस करना लगभग असंभव हो गया है ! आने वाले दिन घास – फूस की जुगाली करते ही बिताने पड़ सकते हैं ‘ नथुना फुलाते हुए शेरनी ने कहा और सभा छोड़ के चली गयी ! जंगल के एक कबाबी ने शेरनी को रोकने की कोशिश करते हुए कहा ‘ यह एक कृत्रिम संकट है जिसका लाभ मीडिया उठा रही है !’

‘ मित्रों मक्खन लगाने से मटन की गाड़ी पटरी पर फिर से आ सकती है ! ‘ सियार बोला ! अलग – अलग जायका पसंद करने वाली लोमड़ी बोल पड़ी ‘ खुराक में प्रोटीन की अहम भूमिका है. प्रोटीन शरीर में मांसपेशियों का निर्माण करता है इसलिए मीट पर टैक्स लगाने की योजना बन रही है ‘ ! ज्योत्षी तोते ने कहा ‘ शेर का पेट खराब हो तो वह घास पर मुंह मारता है ! शेर जब चिकन खा – खाकर पेट खराब कर लेगा तो फिर वो घास खाना शुरू कर देगा ‘ ! देखते देखते जंगल में मांस पर तीखी राजनीतिक और धार्मिक बहस शुरू हो गई !

शेर ने फिर बोलना शुरू किया ! ‘ पंजे और नाख़ून के रहते हुए भी कमांड और कंट्रोल दोनों ताक़तें कमज़ोर हो रही हैं ! पेट भर मांस के बिना मेरी मति भ्रम हो गयी है ! सूर्योदय से पहले ही आंखें खुल जाती हैं ! रात और दिन एक भिक्षु की तरह जबरदस्त बेचैनी और तकलीफ महसूस करता हूँ ! बिना कुछ बोले अपने मन से उमड़ रही भावनाओं का सामना करना पड़ता है ! अंदर क्रोध, तनाव, झुंझलाहट और निराशा पिघल रही है !’ शेर की आँखें भर आयीं ! ‘प्रकृति बहुत क्रूर है, जो जीवित रहने के लिए फिट नहीं होते हैं वो विलुप्त हो जाते हैं ! ‘ एक कौव्वे ने यह कह कर सबके जले पर नमक छिड़क दिया !

‘ हमें पहले शिकार से रोका गया और अब भूखा रखा जा रहा है ! हम आबादी पर हमला करेंगे और खून की नदियाँ बहा देंगे !’ मांसाहारी जानवरों की ये बात हाथियों ने सुनते ही कहा ‘हम जंगल छोड़ देंगे !’ अजगर और घड़ियाल बोल पड़े ‘हम एक दुसरे को खा लेंगे !’ क्या प्राकृतिक संतुलन जैसी कोई चीज नहीं है ? गाय के चमड़े से बने कोल्हापुर का पारंपरिक चप्पल पहने भालू ने पुछा !

संकट की इस घडी में दुष्ट लोमड़ियों ने नया नारा दिया ‘ मानव अधिकार पशु अधिकार नहीं हैं ‘ ‘क्या हम तैर के मछलियों का शिकार नहीं कर सकते ? ‘ मख्खी ने पुछा ! ‘ हम जंगल से गायब हो जाते हैं !’ चीटियों ने राय दी ! ‘ फिर हम कहाँ जायेंगे ? ‘ कौव्वे कौतुहल वश पूछ बैठे ! ‘ हम शहरों में रहेंगे ‘ कुत्तों ने कोरस में कहा ! ‘ हम शहर में आदमियों के मुखोटे पहन के रहेंगे और अपने पसंद का मांस पेट भर के खाएंगे ‘ एक कुत्ते की इस उक्ति पर मारे गए मति के सभी जानवर सहमत हो गए ! मांसाहारी पशुओं के पास कोई चारा नहीं था ! जंगल खाली हो गया ! मनुष्यों ने जंगल के बचे हुए पेड़ पौधों को गमले में रख लिया और शहर में रहते हुए जिन जानवरों का मुखौटा गिर पड़ा वो पकड़ लिए गए ! कुछ को पिंजड़े में, कुछ को सर्कस में, कुछ को चिड़ियाँ घर में, और कुछ को न्यूज़ चैनेल, सोशल साइट और राजनीती में अपने पसंद का कच्चा मांस खाने के लिए छोड़ दिया गया

गर्रम – चाय

नास्त्रेदमस

लगभग साढ़े चार सौ साल पहले की बात है ! गर्मी के दिन थे ! भविष्य की बातों की घोषणा करने के लिए मशहूर नास्त्रेदमस नहा रहे थे ! दुनिया की घटनाओं से भरी नास्त्रेदमस की बाल्टी गा रही थी और सुग्गा रूपी मग्गा साथ में बज रहा था ! लकड़ी से बनाये गये टब में बैठे नास्त्रेदमस नहाते – नहाते अपने क्रिस्‍टल बॉल से खेल रहे थे और नोट्स बना रहे थे ! नास्त्रेदमस के पारदर्शी क्रिस्‍टल बॉल में बार बार एक लड़का गर्मी में भी चाय बना कर उसे बेचने भाग रहा था ! ‘ गर्रम – चाय, चाय – गर्रम ‘ की आवाज़ से नास्त्रेदमस का स्नान घर गूँज उठा !

लड़के को क्रिस्टल बॉल में देख कर नास्त्रेदमस ने उसे पहचान लिया ! वो नरेंद्र चायवाला था ! नास्त्रेदमस ने पहचान लिया गर्मी से परेशान ये सात साल का चाय वाला और कोई नहीं भारत का प्रधानमंत्री है ! फ्रांस में बैठे – बैठे नास्त्रेदमस ने गुजरात के एक चाय वाले छोकरे से एक कप चाय ले कर पी ! उन दिनों नरेंद्र चाय बेचते – बेचते गुजराती में हिन्दी सीख रहा था ! नास्त्रेदमस नरेंद्र से फ्रेंच में बात कर रहे थे ! नरेंद्र धरल्ले से जवाब दे रहा था क्योंकि पन्द्रह सौ पचपन में फ़्रेंच गुजराती से मिलती जुलती भाषा थी !

बहादुर नरेन्द्र ने भी नास्त्रेदमस को पहचान लिया था ! नरेंद्र जानता था भविष्य जानने के लिए प्रातः काल या संध्या काल को श्रेष्ठ माना जाता है और एकांत वाली जगह को उत्तम माना जाता है ! इसलिए नरेन्द्र नास्त्रेदमस से मिलने भविष्य के बुलेट ट्रेन में बैठ कर चाय बेचता हुआ क्रिस्‍टल बॉल के माध्यम से फ्रांस में उनके स्नान गृह पहुँच गया था ! नास्त्रेदमस जान गए कि भविष्य में नरेंद्र चाय वाला उनकी तरह ही लैटिन, यूनानी और हीब्रू भाषाओं के अलावा गणित, शरीर विज्ञान एवं ज्योतिष शास्त्र जैसे गूढ विषयों पर विशेष महारत हासिल कर लेगा और आकाशवाणी में सबसे अपने मन की बात कर सकेगा ! बुद्धि – चातुर्य और ताकत की वजह से यह एशिया पर राज करेगा !

नरेंद्र के चेहरे पर बचपन में भी बुद्धिमत्ता, कुलीनता और सम्पन्नता की छाप स्पष्ट देखी जा सकती थी, पर नरेंद्र चंचल था ! नरेंद्र का ध्यान खींचने के लिए नास्त्रेदमस चाय की चुश्कियों के साथ मस्तिष्क तरंगों से नरेंद्र की केतली को बार बार अपनी ओर मोड़ देते !

नास्त्रेदमस एक नए स्वर्ण युग को नरेंद्र की चाय की केतली में उबलता हुआ घण्टों देखते रहे ! संकेतों को पढ़ कर नरेंद्र चायवाले के लिए नोस्ट्राडामस ने अपनी भविष्यवाणियों को क्रम में लिखा फिर उन्हें हवा में फेंक दिया ! उन्होंने लिखा ‘ चीन, उत्तर कोरिया, वियतनाम, कंबोडिया और अन्य पूर्वी एशियाई राष्ट्र साम्यवाद को छोड़ देंगे ! मध्य एशिया में नरेंद्र चायवाला एक महत्वपूर्ण व्यक्ति होगा, जो एक परामर्शदाता के रूप में सम्राट और अन्य विश्व के नेताओं के साथ उनके सामने समान मेज पर बैठेगा ! प्राचीन देवताओं के मंदिरों और मूर्तियों को बुलेट ट्रेन में घुमायेगा ! मंगल ग्रह की ओर जाने वाले यान की तस्वीर दो हज़ार के नोट पर छापेगा ! ‘

‘इस गर्मी छुट्टी में मुझे और क्या करना चाहिए ?’ नरेंद्र ने पूछा ! ‘ इस गर्मी छुट्टी में ‘स्वयंसेवक’ बन जाओ तुमको आध्यात्मिकता की खुराक मिलेगी ‘ नास्त्रेदमस ने क्रिस्‍टल बॉल से खेलते हुए जवाब दिया ! ‘ लेकिन मुझे ऐसा करने के लिए पैसे की ज़रूरत नहीं पड़ेगी ?’ मासूम नरेंद्र ने पूछा ! ‘ जितना पैसा किसी कॉलेज की शिक्षा पर खर्च करोगे, उतना पैसा नहीं ‘ नास्त्रेदमस ने नरेंद्र की आँखों में आँखें डालते हुए जवाब दिया ! ‘ सुनो नरेंद्र भविष्य में आए दिन सोशल मीडिया पर तुम्हारे नए – नए जोक्स वायरल होंगे ! जब – जब ऐसा हो तो एक महीने के लिए सोशल मीडिया से दूर रहना ! जाओ ज़िन्दगी जियो नरेंद्र ! प्रधानमंत्री बन कर पाँच साल में धरती का कोई भी देश यात्रा से बचना नही चाहिए ! किसी को पता न चले कि तुमने चुनाव जीता या वर्ल्ड टूर का पैकेज ! अमेरिका जा कर मार्क ज़ुकरबर्ग से मिलना और कैंडी क्रश रिक्वेस्ट को बन्द करने के गम्भीर मामले पर एक बार विचार जरूर करना ! विश्व भर की युवा पीढ़ी इस बात के लिए तुम्हारी ऋणी होगी !’ उस दिन अपना भविष्य सुन लेकर नरेंद्र के हाथ से खाली केतली छूट गयी ! नरेंद्र ने फिर दुबारा केतली नहीं उठाया ! वो जान गए थे भविष्य में उन्हें जेटली मिलेगा !

स्नान घर में नास्त्रेदमस ने आगे कहा ‘ नरेंद्र पचपन साल में सब तुम्हारे सेवक होंगे और चार सौ पचपन साल में तुम्हारे राज के गर्मी में जो भी कुछ सस्ता होने की उम्मीद करेंगे वो खुद अपनी नज़र में सस्ते हो जायेंगे ! ‘

नास्त्रेदमस ने १५ वीं सदी में ही भाजपा का उल्लेख किया है ! अपने सेंचुरी ग्रन्थ में फ़्रांसिसी भविष्यवक्ता ने भविष्य की भाषा हिंदी में लिखा ‘ भाजपा राज में थोड़ी सी चतुराई भरी सोच और सरलता से लड़कियाँ रेप किये जाने से बच जाएँगी ! उत्पाद बात करेंगे ! टेलीविजन चैनल भगवान के दूत होंगे ! मोदी राज में त्वचा को गोरा करने वाली सभी क्रीमें बे – असर हो जाएँगी ! नरेन्द्र की एक अप्रत्याशित घोषणा, रियल एस्टेट डेवलपर्स और व्यापारियों को सबसे अधिक प्रभावित करेगी, क्योंकि दोनों ही आम तौर पर करों का भुगतान करने से बचने के लिए नकदी में काम करते हैं ! ‘

नरेंद्र ने भी अतीत में चाय बेचते हुए अपना भविष्य देख लिया था ! नास्त्रेदमस नरेंद्र के साथ बाहर टहलने निकले, उन्होनें बाग़ में एक युवक को देखा और जब वह युवक पास आया तो नास्त्रेदमस ने उसे आदर से सिर झुकाकर नमस्कार किया ! बगल में खड़े नरेंद्र ने आश्चर्यचकित होते हुए इसका कारण पुछा तो उन्होने कहा कि यह व्यक्ति आगे जाकर पोप का आसन ग्रहण करेगा ! किंवदंती के अनुसार वास्तव मे वह व्यक्ति फेलिस पेरेती था जिसे १५८५ मे पोप चुना गया !

नरेंद्र चायवाला भी २०१४ में प्रधानमंत्री बना और वो सब बात सच हुई जो नास्त्रेदमस ने १५५५ में उस गर्मी के दिन नहाते हुए लिखा था ” भारत का प्रतिनिधित्‍व एक ऐसा व्‍यक्ति करेगा जिससे शुरुआत में लोग बहुत ही नफरत करेंगे लेकिन बाद में जनता और बाकी सभी लोग उसे उतना प्‍यार देंगे कि वह अगले बीस साल तक भारत का प्रधानमंत्री रहेगा “

मन का हुड़दंग

मैं एक ट्रोल हूँ

मैं एक ट्रोल हूँ ! मेरा नाम चट्टान भगत है ! मैं वायरल और क्रूर हूँ ! मैं गरज गंज के बरस नगर में रहता हूँ ! मैं सच्चा हुड़दंगी हूँ ! इन्टरनेट पर चहचहाने वाली फेयर एंड लवली लड़कियों का प्रोफाइल मेरा अड्डा है ! सेक्सिस्ट ट्विटर में बुद्धिमान युवा मेरे ग्राहक हैं ! मेरी कंपनी का नाम ड्रीमट्रोल है ! हम ‘ए’ लेवल का ट्रोल करते हैं ! स्टीरियोटाइप जीवन ही मेरी जननी है ! मैं गूगल सर्च से निकला हूँ ! मुझे स्कैंडिनेवियाई लोककथाओं और बच्चों की कहानियों से निकाल के लाया गया है ! मैं गंभीरता से देखा, पढ़ा और सुना जाता हूँ इसीलिए मैं महत्वपूर्ण हूँ ! मुझे केवल लंठ समर्थक समझना आप की भूल है ! हम अपना सारा काम छोड़ के बवाल मचाते हैं ! मुझे बीमार, बर्बाद और बेकार बोलने वालों को मेरी ताक़त का अंदाज़ा नहीं है ! केवल सोशल मीडिया में हंगामा मचाना ही मेरा मकसद नहीं है ! जो ये समझते हैं कि हमारे तूफान मचाने की राजनीति का मकसद एक पार्टी के हक में हिन्दू मुस्लिम गोलबंदी करना है वो भी सही नहीं हैं ! हमें गोल कर के वे भी बेकार में चौड़े हो रहे हैं ! तस्वीर निकालो, लाल रंग से घेर दो और व्हाट्स अप में फैला दो, ये अब धरना प्रदर्शन जैसा पुराना तकनीक है ! मैंने दो हज़ार के नोट में चिप डाला है ! यूनेस्को से प्रधानमंत्री को एप्रूव्ड करवाया है ! मेरी वजह से सोशल मिडिया अब सोचल – समझल मिडिया है ! मैं पत्रकारों और राजनेताओं की पसंद हूँ ! रिसर्च सेंटरों के आंकड़े मेरा यार हैं ! लोगों की प्रतिक्रिया के लिए इंटरनेट पर बेवकूफ और भड़काऊ बातें करता हूँ !

माइक्रो – ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर और हर तरह की सामाजिक नेटवर्किंग साइट पर अपमानजनक संदेश प्राप्त करने के लिए आप मुझसे संपर्क कर सकते हैं ! भद्दी टिप्पणियां देना मेरा पेशा है ! सोशल मीडिया पर सबको सलाह देना मेरा काम है ! मैं अपना काम छोड़कर दूसरों की चिंता में ही डूबा रहता हूँ ! मुझसे दुश्मनी कर के आप ट्विटर के टॉप ट्रेंडिंग लिस्ट में शामिल हो सकते हैं ! मैं आप को रातों रात हैशटैग बना सकता हूँ ! मेरे उपद्रव को देखना है तो मुझसे जुड़ जाइये ! सोचल – समझल मीडिया की अपनी बदमाशियां हैं ! सिर्फ़ ज़ोर – ज़ोर से बोलना ट्रोलिंग नहीं है ! ट्रोल इन्टरनेट पर आत्म – जागरूकता का एक रूप है !

ट्रोल इन्टरनेट पर असामाजिक, झगड़ालू और धीमी गति से रेंगने वाला जीव होता है जो दूसरों के लिए जीवन को कठिन बनाता है ! घृणा फैलाना ‘पेड’ ट्रोल का धर्म होता है ! ऑनलाइन चर्चा अक्सर आप के हाथ से निकलते ही मुझ तक पहुँच जाती है ! अपने नृशंस ट्वीट्स के साथ मैं एक पल में अश्लील हो जाता हूँ ! भारतीय ट्रोल सबसे ज्यादा अपमानजनक, सबसे अधिक लिजलिजा और पृथ्वी पर सभी ट्रोल में सबसे बढ़कर अश्लील है ! मेरी बातों पर भरोसा न हो तो आप अपने ई – समाचार पत्रों, ई – पत्रिकाओं, ब्लॉगों, यू – ट्यूब और किसी भी प्लैटफॉर्म के कमेंट बॉक्स में जा कर खुद मेरा काम देख लीजिये !

वर्ल्ड वाइड वेब पर एक पेशेवर ट्रोल के रूप में अपने शिकार को लेबल करने से पहले मैं तौलता हूँ, फिर ट्रोलता हूँ ! जानबूझकर ट्रोल हिट लिस्ट बनाकर दूसरों को उत्तेजित या अपमानित करने का प्रयास करता हूँ ! इन्टरनेट पर मुझे कच्ची शराब जैसी सड़ांध पसंद है ! मेरा नारा है ‘ मेरे ट्रोल से ही चलेगा ये वतन, बढ़ा क़दम !’ राष्ट्रवाद को ट्रोलबाद से रिप्लेस करना है ! आप मेरी निंदा चुप रहकर कर सकते हैं ! अगर आप मेरा समर्थन कर भी रहे हैं तो एकदम सामने से मत कीजिये ! ट्रोल को इशारा काफी है ! मेरा समर्थन करने के लिए आपकी चुप्पी उस दिन सराही जाएगी जब हम सब इन्टरनेट पर अपनी पहचान खो चुके होंगे !

प्रकृति का ट्रोल मधुमख्खी है ! अगर आप मधुमख्खी के छत्ते को दुहना नहीं जानते तो मधुमख्खी के छत्ते में हाथ मत डालिये ! वो खुद अपना रस पी कर स्वाहा हो जायेगा ! आप ने निर्जन छत्ते जरूर देखे होंगे जिसे ट्रोल छोड़ चुके हैं ! ट्रोल को अनदेखा करना ही उनसे बचने का सबसे अच्छा तरीका है ! आप पाबंदियों के बारे में बात करना चाहते हैं तो मुझसे बात मत कीजिये ! आँख बंद कर के अपने आप से सिर्फ़ दो सवाल कीजिये ‘आप इन्टरनेट पर किसकी माला जपने आते हैं ? ‘ ‘महिलाओं पर हमला करने की अपनी विकृत इच्छा के बारे में आप क्या जानते हैं ?’ आप ने अपने ह्रदय के अंदर जा कर अगर इन दो प्रश्नों का जवाब दे दिया तो आप को अपने हर सवाल का जवाब मिल जायेगा !

दलाली, भ्रष्टाचार और गोरखधंधे में लिप्त देशभक्त ट्रोल की शक्ति को कभी नहीं पहचान पाएँगे ! सच्चा ट्रोल ये मानता है कि लोकतंत्र में स्वस्थ ट्रोल – तंत्र के लिए सरकार की आलोचना के साथ साथ नागरिकों का ट्रोल भी होना अत्यंत आवश्यक है ! मेरी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी इंटरनेट को एक मंच मानती है, और सभी यूज़र्स आप जैसे जोकर या मुझ जैसे ट्रोल हैं ! ट्रोल का कोई लिंग नहीं होता, ट्रोल समलैंगिक होते हैं ! हर बात के लिए मेरे पास अपना आंकलन है !

मैं किसी के बेटे का नाम रखे जाने से शुरू होकर उसकी पत्नी की स्लीवलेस ड्रेस से होता हुआ उसकी माँ की ट्रेन यात्रा पर जा पहुँचता हूँ ! शारीरिक व्यायाम को भी धर्म से जोड़ सकता हूँ ! कोई मेरी बोलती बंद नहीं कर सकता, हम सब मिल कर उसे बोतली में बंद कर देते हैं ! हम अत्यधिक संगठित हैं ! ट्रोलिंग पाप या अपराध नहीं है ! लाखों ग्राहक के मनोरंजन के लिए ट्रोल इंटरनेट पर बदमाशी का एक सामान्य रूप है ! आप किसी को भी वोट करें कोई गलती नहीं करेंगे ! ग़लती तब करेंगे जब कौन अच्छा है उसे लेकर इन्टरनेट पर बहस करेंगे !

इन्टरनेट के बाहर अलग से मैग्निंफाइंग ग्लास लेकर भी मुझे ढूंढेंगे तो मैं नहीं मिलूँगा ! इन्टरनेट पर अभी तो मेरे होने और न होने पर ही बहस है ! मेरे लिए ख़ुशी की बात है कि मुझे भी स्टीरियोटाइप से ही देखा जा रहा है !

आप को ट्रोल की शुरुआत करनी है तो ट्रोल करते हुए गन्दी भाषा का उपयोग करें और ऐसा करने के लिए खुद को प्रेरित करें ! भारत में आप टैक्स से बच सकते हैं पर अपने टेक्स्ट से नहीं बच सकते ! मैं आप की मदद के लिए आ ही जाऊँगा ! अपनी ट्रोल शक्ति से राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों के संरक्षण की निगरानी करते हुए ट्रोल परिषद की सलाहकार समिति ने मुझे सुझाव दिया है कि मैं ट्रोल पावर को निभाने और अपने मालिक के प्रोफाइल को बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत करूँ ! जो सबका मालिक है वो मेरा भी मालिक है ! सभी भारतीय ट्रोलर्स, भारतीय इंटरनेट ट्रॉलिंग को बेहतर बनाने के सुझाव दें ! आपके फीड से मुझे फ़ूड मिलेगा ! आप मेरी ऑनलाइन खरीदारी भी कर सकते हैं !

आज के ज़माने में सामाजिक नेटवर्किंग सेवा पर मेरे लिए अतिरिक्त पुलिस बल और मजिस्ट्रेट के साथ – साथ मेडिकल टीम और फायर ब्रिगेड के टीम को भी हर पल तैयार रहने का निर्देश दिया गया है ! संदेह व सूचना के आधार पर सोचल – समझल मिडिया में मेरी छापामारी जारी रहेगी ! रंग अबीर गुलाल के साथ साल में एक दिन होली का हुड़दंग अब सिर्फ बच्चों का खेल है ! इन्टरनेट पर तीन सौ पैंसठ दिन, मन का हुड़दंग ही होली का असली हुड़दंग है ! कमज़ोर मोबाइल सिग्नल वाले इस खेल से दूर रहें ! मेरा आनंद लेने के लिए आपके फोन का स्मार्ट होना जरुरी है ! आप मुझसे ट्रोलिंग अनुरोध भी कर सकते हैं ! मुझे ट्रोल फ्री नंबर पर फोन कीजिये ! आप गाइये सा रा रा, मैं गाऊंगा ट्रा ट्रा ट्रा !

अभिव्यक्ति : पंच – तंत्र का छठा सेंस

Jai Hind

Jai Hind

सैकड़ों साल से नदी – नाले – तालाब के पानी की गहराई नाप आने वाले कछुआ का प्लास्टिक प्रदूषण से असमय ही निधन हुआ था ! घुट कर मारे गए कछुआ की शोक सभा में अभिव्यक्ति पर काव्य पाठ होना तय हुआ ! जंगल में काव्य पाठ कोई नयी घटना नहीं थी ! अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की ऑनलाइन जंगल में आज फिर अग्नि परीक्षा थी !

स्वच्छ जंगल में अभिव्यक्ति पर विमर्श और काव्य-पाठ ? सुनते ही सिंह को डकार आ गया ! जोश में भूख से अधिक खा लिया गया ट्रेंड होता हुआ कल का वाइल्ड गधा अभी पेट में पचा नहीं था और अपच से रात भर नींद भी नहीं आयी थी ! अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कविता पाठ और उस पर बहस कैसे पचेगा ये सोच कर सिंह का मुँह पहले कसैला फिर गधेला हो गया ! जंगल के अप्डेट्स के लिए अपने सहायक लकड़बघ्घे को मिस्ड कॉल दे कर सिंह ऊँघने की कोशिश करने लगे !

लकड़बघ्घे को जब किंग का मिस्ड काल मिला तब वो कछुए की याद में अपनी प्रोफाइल पिक बदल रहा था ! अपने बॉस सिंह के कॉल को रिप्लाई करने से पहले उसने सिंह के ट्वीट्स चेक किये ! सियारों के द्वारा साढ़े चार सौ बार री – ट्वीट हुआ ‘ गधे ऑन माइंड ‘ चौबीस घंटे पहले उनका लास्ट ट्वीट था ! व्हॉट्सएप पर भी ‘लास्ट सीन’ चौबीस घण्टे पहले का ही था ! कहते हैं लकड़बघ्घे को मिस्ड कॉल का इशारा ही काफी है !

अगली सुबह ऑनलाइन जंगल में कछुए की वनमानुष कद फोटो के सामने सब मौन थे ! गेंदे की हार में लिपटा कछुआ का फोटो वैसा ही लग रहा था जैसे वो प्लास्टिक के लिपटने से घुट – घुट के मरा था ! मोमबत्ती जल रही थी ! भावना बड़ी चीज़ है ! पशु – पक्षियों ने मिट्टी ला – लाकर शोक सभा का मंच बनाया था !

‘ आम तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को ‘ बोलने की आजादी ‘ के रूप में समझा जाता है, लेकिन वह सिर्फ बोलने की आजादी नहीं, उसमें और भी कई चीजें आती हैं ! जंगल को बेहतर बनाने के लिए हर काम इसमें शामिल है ! ‘ सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण की शुरआत में ये साफ़ करते हुए शोक सभा की शुरआत की !

‘ जिस जंगल में पचास फ़ीसदी जानवर अशिक्षित हैं ! जहाँ के पैंतीस प्रतिशत पशुओं को पीने के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है ! जिस जंगल में विकास की ढोलक तो बजती है लेकिन यह भुला दिया जाता है कि ढोलक के आवरण के साथ ही दोनों छोर जानवर के खाल से बने हैं और खोखले हैं ! जहाँ प्रत्येक तीसरे दिन किसी न किसी के भूख से तड़प कर मर जाने की ख़बर आम है ! ऐसे में विचार और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का रोना व्यर्थ ही जान पड़ता है ! घड़ियाल के एक मण्डली के प्रतिनिधि ने शोक सभा का विरोध करते हुए कहा !

विलुप्त गिद्ध ने आगे जोड़ा ‘ पंच – तंत्र के निर्माताओँ ने अभिव्यक्ति को मूल अधिकारों का स्थान देकर हमें मुक्त आकाश में विचरण करने वाला पक्षी तो बना दिया है, लेकिन हमारे भोजन को हमसे छीन कर हमारे पंखों को काट दिया है ! आज हमारे बीच कछुआ होते तो मेरी बात का समर्थन करते !’ ये कहते हुए आखरी निरीह गिद्ध रो पड़ा !

‘ सवाल उठाना हमारा अधिकार है ! एक जानवर की सिर्फ इस अफवाह पर हत्या कर दी गई कि उसने गोमांस खाया था ? सिंह को ऐसा अपराध करने वालों को रोकना होगा ! जानवरों को अधिकार की गारंटी चाहिए ! सूचनाओं के अंबार में किसी किस्म की तानाशाही को छुपाया जाना संभव न होगा ! ‘ मोर बोल पड़ा !

‘ माना कि मूक रहना दासता की निशानी है और मुँह का खुलना आज़ादी का सूचक ! लेकिन मुँह का ज्यादा खुलना भी तो बीमारी का सूचक ही है ! जंगल में कहा जाता है कि ‘ हमारी आज़ादी वहीं पर खत्म होती है जहाँ पर दूसरे जानवर की नाक शुरु होती है ‘ खाने की स्वतंत्रता भी जीने के अधिकार में शामिल होना चाहिए ! कोई जानवर क्या खाता है, क्या पीता है, कैसे रहता है, और क्या पहनता है ? इसमें दूसरे जानवर की दखल – अंदाज़ी सही नहीं कही जा सकती है !’ बुजुर्ग बंदरों की आज़ादी पर गंभीर काम करने वाले शांत घोड़े ने कहा !

अभिव्यक्ति के बहस को हाथ से निकलता देख कर लकड़बघ्घे ने काव्य पाठ की घोषणा कर दी !

शोक सभा में पशुवादी एक्टिविस्ट चिंतक कवि खरगोश से जब जाति का कॉलम भरने को कहा गया था तो उसने रिक्त स्थान में ‘ पशु ‘ भरा था ! नवाचारी खरगोश के सिंग नहीं होते ! पशु कवि खरगोश ने अपनी पतली आवाज़ में पाठ शुरू किया ! खरगोश ने मुंह खोला ‘ मेरी कविता का शीर्षक है, सब ढोंग है ‘ ये सुनते ही जानवरों की पूँछ, सींग, पाँख और कुछ के नथुने फड़फड़ाने लगे ! खरगोश ने सब अनदेखा कर के पूरी ताक़त के साथ अपनी कविता पाठ शुरू की ! ‘ काला कौव्वा सिर्फ काँव काँव करता है … ‘ कविता की पहली ही पंक्ति सुन कर कव्वे क्यों चुप बैठते ! सब मिलकर सचमुच काँव – काँव करने लगे ‘ नौटंकी बंद करो ! सिंह, इस्तीफा दो ! ‘ काँव – काँव की शोर में कविता की अगली पंक्तियाँ किसी ने नहीं सुनी ! होली में अपने ऊपर रंग फेंकने के विरोध में डिजिटल जंगल के कुत्ते अपनी कविता लिख कर लाये थे जिस पर खरगोश की विवादास्पद कविता ने पानी फेर दिया था ! वे भी भोंकने लगे ! नौ सौ चूहे वाली बात के अफ़वाह पर बिल्लियों के पास भी एक कविता थी ! उनका कहना था न वो इतने चूहे खाती हैं न हज़ करने जाती हैं ! वो भी शोर मचाने लगीं ! मौका देख कर बन्दर भी खों – खों करने लगे ! ‘ जंगल के टुकड़े टुकड़े होंगे ! ‘ बंदरों का यह नारा सुन कर जंगल की सीमा पर जंगल की रक्षा करते हुए पशुओं का सर शर्म से झुक गया !

‘ यहाँ जंगल का कानून नहीं मेरा कानून चलेगा ! ये ठोस जंगल है ! यहाँ काठ के उल्लू नहीं रहते ! तुम सब डाल – डाल तो मैं पात पात ! ‘ सिंह ने गरजते हुए साफ़ किया ! ‘ ऐसी किसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है जिससे जंगल की सुरक्षा को ख़तरा हो ! अन्य वनो के दुसरे पशु – पक्षियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों पर आंच आए, जंगल का क़ानून व्यवस्था खराब हो, किसी जानवर या समूह का मानहानि हो, किसी जानवर को अपराध के लिए प्रोत्साहन मिले, और जंगल की एकता, संप्रभुता और अखंडता को ख़तरा हो ! मेरे इन विचारों के सबसे करीब कौन है ? ‘ सिंह ने फिर दहाड़ लगाई ! सिंह का क्रोध देख कर सभा में सब खड़े हो गए ! कोरस में सबने एक साथ तीन बार कहा ‘ मन की बात / मन की बात / मन की बात !’ शोर के बीच गैप मिलते ही सबको शांत करते हुए सहायक लकड़बग्घे ने कहा ‘ प्रतिभा और पशुता का सम्मान होना चाहिए ! समय आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, संवाद का है, कविता पाठ का है !’ सिंह ने खरगोश को गुर्राते हुए कहा ‘ मैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर विश्वास करता हूं लेकिन यह उचित कानूनी ढांचे के भीतर होना चाहिए ! ‘ ऑनलाइन जंगल में रहने वाले जानते हैं कानूनी ढांचे के भीतर खाए हुए जानवरों के खाल भरे थे !

‘आखिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जरूरत क्या है ?’ वाइल्ड ऍस का सवाल सुन कर सिंह ने मुस्कुराते हुए उसे सिर्फ नशीली आँखों से देखा और बोला ‘ चिढ़ानेवाला, असहज करनेवाला और बेहद अपमानजनक बातें करने वाले जानवर को मैं खा जाऊंगा ! ‘ सिंह की बात सुन कर गधा डर के ऐसा भागा कि फिर अपने विज्ञापनों में भी नहीं दिखा !

आज के काव्य पाठ का खुफिया महत्व था ! आगामी चुनाव के लिए जानवरों के मन को पढ़ा जाना था और हर शाख पर उल्लू बैठ कर जानवरों का दिमाग पढ़ रहे थे !

‘ पूरे जंगल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को ढाल बनाकर अप्रिय स्थितियां पैदा की जा रही हैं ! ‘ ये कहता हुआ हाथी व्यथित लग रहा था ! पिनक में हाथी ने यू – टर्न ले लिया ! सब जानते हैं हाथी जितना बड़ा होता है उसका यू – टर्न भी उतना ही बड़ा होता है ! पास के अमरुद का बड़ा पेड़ हाथी के पिनक का शिकार हो गया और जाते जाते उस पर बैठे सभा के तोतों को हाथी उड़ा गया !

उड़ते तोतों को देख कर सुस्त भालू की मंडली जो आज तक कभी सरपंच का चुनाव भी नहीं जीत सकी थी, तोतों के हित में हाथी विरोध के नारे लगाने लगे !

इसी बीच शोक सभा में हो रहे इन घटनाओं को लेकर जानवरों के ट्वीट से जंगल भर गया !

‘ जंगल में सोशल मीडिया पर पशु अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरूपयोग कर रहे हैं ! साइबर सेल को पता है कि कौन क्या लिख रहा है ! ‘ लकड़बघ्घे ने मोबाइल स्क्रीन को देखते हुए कहा ! इस बात से सभी चूहे चोंके ! पीला लंगूर जो ऊंघ रहा था ये सुन कर जाग गया ! ‘ जानवर कृपया अन्धविश्वासी मनुष्यों जैसा वर्ताव न करें ! ‘ लकड़बघ्घे ने फोन को जेब में रखते हुए कहा !

जंगल का सांस्कृतिक परिदृश्य साफ़ था ! धनपशुओं की औलादों के सुझाये गए मार्ग पर सभी पशुवत चल रहे थे ! जंगल की राजनीति इसलिए नहीं सुधर रही थी क्योंकि पशु अपने अपने स्वार्थ में थे और निहित स्वार्थ में जंगल को किसी टहनी पर रखकर सब पशु बेशर्म हो गए थे !

वास्तविक स्वतंत्रता एक मिथक है ! स्वतंत्रता केवल सापेक्षता के माध्यम से परिभाषित किया जा सकता है ! जंगल में स्वतंत्र सिंह का जीवन सच्ची स्वतंत्रता की सबसे आदर्श परिभाषा है ! जंगल को सुचारू रूप से चलाने के लिए बोलने की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी बहुत ज़रूरी है और जंगल में इसे आज़ादी की पहली शर्त माना जाता है ! अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी अधिकारों की जननी है ! इन्ही हितों के लिए जंगल के राजा सिंह द्वारा जानवरों को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई थी , ताकि पशु उन पर अमल कर सकें ! विचारों पर बहस और चर्चा कर सकें जिससे अन्य पशुओं और पक्षियों के साथ वन को समृद्ध बनाया जा सके !

भगदड़ में सभा समाप्त हो गयी ! मंच पर कछुआ का पोट्रेट घुट घुट के मरने के लिए अकेला रह गया था ! कछुआ प्लास्टिक प्रदुषण से यूँ ही घुट कर नहीं मरा था !

अगले दिन जंगल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रहते हुए स्वस्थ सोच को कैसे डेवेलॉप किया जाए, इस विषय पर ऑनलाइन इंटरेक्टिव सामग्री बनाने के लिए पड़ोसी देश भूटान से आये अतिथि याक के साथ सभी जानवर अपनी सेल्फी खिंचवाने में व्यस्त थे !

विकासशील जंगल में अभिव्यक्ति हमेशा की तरह धूर्त, चोट्टे, सेटिंग – बाज, सफेदपोश स्वार्थी जानवरों के कुर्बान चढ़ गया ! जंगल राज के पंच – तंत्र में सबका छठा सेंस कह रहा था कि कुछ तो गड़बड़ है, क्या गड़बड़ है ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रहते हुए भी कोई व्यक्त नहीं कर पा रहा था !