चल ‘इसरो’ घर आपने, उपग्रह पहुँच गए आकाश – ‘अमीर इसरो’

इसरो रैन चुंनाव की, जागी रॉकेट के संग !
तन मेरो मन इंडियन को, दोउ भए एक रंग !!

इसरो दरिया ज्ञान का, उल्टी वा की धार !
जो उतरा सो उड़ गया, जो उड़ा सो पार !!

सैटेलाइट बनाई जतन से, चरखा दिया जला !
आया नेता खा गया, तू बैठी ढोल बजा !!

नेता सोवे सेज पर, मुख पर डारे विकास !
चल इसरो घर आपने, उपग्रह पहुँच गए आकाश !!

इसरो मौला के रुठते, पी एम के सरने जाय !
कहे इसरो पी एम के रुठते, मौला नहिं होत सहाय !!

– ‘अमीर इसरो’

‪‪#पैरोडी‬ #‎कालाहास्य ‪#‎Kanhaiya #JNU

मैया मोरी मैं नहिं नारो लगायो !

भोर भयो स्टूडेंट के पाछे, जेल मोहिं पठायो ।
चार पहर जे एन यु भटक्यो, साँझ परे हॉस्टल आयो ॥

मैं बालक बहिंयन को छोटो, कुर्सी किहि बिधि पायो ।
ग्वाल बाल सब बैर परे हैं, बरबस नारे मुख लपटायो ॥

तू जननी मन की अति भोरी, मिडिया कहे पतिआयो ।
जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो ॥

यह लै अपनी प्रेसिडेंटी , बहुतहिं नाच नचायो ।
‘मस्तान’ तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो ॥