काला हास्य

विष्णु को मानने वाले वैष्णव थे अब सहिष्णु को मानने वाले सहैष्णव हैं !
गाँधी जी सहिष्णु हो कर मुझ हिन्दू अब हिष्णु को माफ़ कीजियेगा ! प्रस्तुत है दुःखी जनों के लिए मेरी पैरोडी

सहैष्णव जन तो तेने कहिये, जे स्टेटमेंट पराई जाणे रे
पर ट्वीट उपकार करे तोये, मन कमेण्ट न आणे रे ।।
सोशल मीडिया मां सहुने वन्दे, निन्दा न करे केनी रे ।।
असहिष्णु सहिष्णु मन निश्चल राखे, धन-धन जननी तेरी रे ।।

सहैष्णव जन तो तेने कहिये, जे स्टेटमेंट पराई जाणे रे ।।

किरण आमिर ने तृष्णा त्यागी, पर स्त्री जेने मात रे ।।
जिहृवा थकी असत्य न बोले, सत्यमेव जयते हाथ रे ।।
इनटोलेरेंट व्यापे नहि जेने, सेलिब्रेटी जेना तन मा रे ।।
राम नामशुं ताली लागी, सकल तीरथ तेना देश मा रे ।।
वण लोभी ने कपट रहित छे, काम क्रोध निवार्या रे ।।
मस्तान तेनु दरसन करता, मजोरिटी कुळ तार्या रे ।।

सहैष्णव जन तो तेने कहिये, जे स्टेटमेंट पराई जाणे रे ।।

वैष्णव जन तो तेने कहिये गुजरात के संत कवि नरसी मेहता द्वारा रचित भजन है जो महात्मा गाँधी को बहुत प्रिय था

‘ट्वीटराती’ – महानगर का टापू / महालोक – अठारह

१.

पंछियों की बोली के नाम पर हर आदमी अपनी आवाज़ बदल कर दूसरों को आवाज़ देने लगा ! सब उसको ट्विटर कहने लगे ! पैदा होते ही सात साल में ट्विटर ने सात जनम ले लिया था ! दिन भर के दिमागी हालत की बयानबाजी का जुलूस जो चाहता ट्विटर पर निकाल लेता ! सात वचन और सात फेरे भी ट्वीट होने लगे ! जीने मरने की सारी कसमें अब ट्विटर थीं ! बातचीत के नाम पर सब टेलीविजन देखने लगते इसीलिए सब ट्वीट करने लगे ! मन की इस आभासी टापू का नाम ट्वीटराती पड़ा ! समय – काल से दूर था ट्वीटराती ! ट्वीटराती में न दिन होता न रात ! आदमी और औरत के लिए ट्विटर अब एक नया बिस्तर था ! तकिये पर एक ट्विटर रख कर लोग जागने लगे और ट्विटर के साथ सोने लगे ! रिश्तों में ट्वीटर ने एक ऐसा चोंच भर दिया था जिसे सब लड़ा रहे थे ! मुक्त सामाजिक जंजाल में एक चिविर् ! ट्वीटराती में सब अपने ट्वीट के साथ ट्विटर की सैर पर निकल पड़े हैं इस बात से अनजान कि नीला आभासी पंछी अब लाल खून का प्यासा है …

२.

ढाई आखर ट्विटर के –
ट्विटर के दो आगे ट्विटर, ट्विटर के दो पीछे ट्विटर, आगे ट्विटर, पीछे ट्विटर, बोलो कितने ट्विटर …