इतना सेंसर क्यों है भाई ?

जय हो ! उड़ता पंजाब उड़ता ही रहेगा ! अब कोई बादल उसे रोक नहीं पाएंगे ! उड़ता पंजाब बादल से निकल कर चंडीगढ़, अमृतसर, तरनतारन, जशनपुरा, मोगा एवं लुधियाना होते हुए उड़ते उड़ते जब मुंबई में सेंसर बोर्ड पहुंचा तो बहुत शोर हुआ ! गिरता, उठता, संभलता हुआ उड़ता पंजाब नशे में था फिर भी उड़ सका और सेंसर बोर्ड तक पहुँच गया इस बात पर सब हैरान थे ! नशे में उड़ते उड़ते पंजाब के कपडे गंदे हो कर फट गए थे, बाल बिखरे थे ! कोर्ट में उड़ता पंजाब कहीं से पंजाब नहीं लग रहा था ! न बल्ले बल्ले न हड़िप्पा ! चुनाव, एमपी, एमएलए, संसद जैसे शब्द भी उड़ते पंजाब की मदद नहीं कर पा रहे थे ! उड़ने से पहले पंजाब क्या कर रहा था ? लेटा था ? सोया था ? बैठा था ? दौड़ रहा था ? या झूम रहा था ? सब अटकलें लगाने लगे ! सैकड़ों मौतें, एड्स और हेपिटाइटिस सी के कई सौ मामलों को लेकर पंजाब कैसे उड़ पाया ? उड़ता पंजाब अकेला था ! नशा, गाली और हिंसा से लिपटे पंजाब को सेंसर उड़ाता रहा और सरसों के खेत मक्के दी रोटी देखते रह गए ! सब उसे उड़ाने वाले की तरफ देखने लगे, पंजाब को उड़ाने वाले सेंसर के संता – बंता थे ! पंजाब राज्य परिवहन विभाग ने पंजाब का साथ सड़कों पर क्यों नहीं दिया जिसकी वजह से पंजाब को सेंसर के साथ उड़ना पड़ा ? संता बंता हंस रहे थे ! उड़ता पंजाब के साथ मीडिया चैनल जातिवाद ,धर्मवाद की राजनीति के साथ ड्रग्स सेक्स धुआँ और सेंसर का कैंसर भी उड़ने लगे थे ! सेंसर कमेटी उड़ता पंजाब देखकर सर्टिफिकेट तय नहीं कर पाई थी !
इस बीच उड़ता पंजाब सेंसर बोर्ड से ऊब कर मुंबई से हवा खाने निकल पड़ा और उड़ते उड़ते टोबा टेक सिंह तक जा पहुँचा ! ज़मीन के उस टुकड़े पर जिसका कोई नाम नहीं था, टोबा टेक सिंह पड़ा था ! टोबा टेक सिंह पंजाब को उड़ता देख बोल पड़ा ” औपड़ दि गड़ दि अनैक्स दि बेध्यानां दि सेंसर दि दाल ऑफ दी निहलानी …
जैसा टोबाटेक सिंह ने देखा, सब उड़ता पंजाब को देखना चाहते हैं !
औपड़ दि गड़ गड़ दि अनैक्स दि बेध्यानां दि मुँग दि दाल आफ दी सेंसर बोर्ड ऑफ़ हिंदुस्तान आफ दी दुर फिटे मुँह ! हुँह !! जमीन बंजर तो औलाद कंजर, क्या करेगा पहलाज का सेंसर ?
उड़ते पंजाब को जब बिहार में हिरामन ने देखा तो जीवन में कभी भी न उड़ने की चौथी कसम खा ली !
सर्टिफिकेट देना सेंसर बोर्ड की ड्यूटी है, पर खाली दिमाग सेंसर का घर हो गया है ! इतना सेंसर क्यों है भाई ?