राग विकट

जनहित में ‘राग विकट’ ! ‘राग विकट’ को ‘देश राग’ में गाने की जरुरत नहीं है ! इसे ‘अपनी डफली – अपना राग’ में गाया जा सकता है !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
दफ़ा दफ़ा / क्यों ख़फ़ा, ख़फ़ा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
नफ़ा नफ़ा / सब सटा सटा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
सपा सपा / सब सफा सफा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
हटा हटा / सब बँटा बँटा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
रुका रुका / सब रुका रुका ! बढ़ा, बढ़ा / बस नमो नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
खुला खुला / मुंह खुला खुला ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
खिला खिला / कमल खिला / जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
सीला सीला / सब होंठ सीला ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
इकट विकट / सब महा टिकट ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

पोस्टर – वार

चुनाव मैदान से ‘पोस्टर – वार’ का एक दृश्य ! इसमें मंच है ! पर्दा है ! पोस्टर है ! चेहरे हैं ! रंग है और नाटक का मसाला है !

Cut to –

चार पोस्टरों ने मुझे घेर लिया था ! चारों प्रचार पोस्टर थे ! शाब्दिक,ग्राफिक और तथ्यों से भरी उनकी अपनी – अपनी विचारधारा थी ! सब मुझ पर चिपकना चाह रहे थे ! एक सत्ता का पोस्टर था जो लगातार सत्ता में होने की वजह से परिवर्तन के सूत्रधार की भेष में था ! चेंज का एजेंट था ! देखने में हाथ से बना ये पोस्टर डिजिटल था ! दूसरा विपक्षी पोस्टर था ! वो जघन्य था ! रूढ़ियों से चिपका था ! तीसरा जनतांत्रिक पोस्टर था ! ये पोस्टर सबसे ज्यादा आकर्षक था क्योंकि इसमें मिडिल क्लास था ! चौथा पोस्टर एक कोलाज था ! जोड़ तोड़ से बना यह पोस्टर हिलते डुलते फ्रेम में किसी तरह फिट था ! ये चारो पोस्टर मुझे घेर के खड़े थे और मैं अवाक था ! जब बरसों तक सोयी राजनीती एक बड़ी करवट लेती दिखाई दे रही थी तभी ये घटना घट गयी थी ! पौ फटने को था ! सब जाग रहे थे ! मैं सुबह घूमने निकला था और उन्होंने सोचा मैं रात का भुला हूँ !

Cut to –

वार रूम था ! मुख्यालय था ! इनपुट डेटा था ! रणनीति थी ! तकनीक था ! उपकरण थे ! टीम थी ! प्रयोजन था ! कई दल थे ! ‘युद्ध’ का माहौल था ! हर तरफ बैठक चल रही थी ! रिजल्ट का सबको इंतज़ार था !

Cut to –

मैं पोस्टर में फँस कर चल नहीं पा रहा था ! आगे अब क्या करूँ कुछ सूझ नहीं रहा था ! पोस्टर से बच कर निकलने की मेरे पास कोई स्ट्रेटेजी नहीं थी ! सब पोस्टर से बच रहे थे और मैं फंस गया था ! पोस्टर मुझे घेर के अपने ‘आदमी घेरो अभियान’ में सफल हो गए थे और मैं ‘ पोस्टर से बचो ‘ खेल में हार गया था और अब शहर भर के सभी आदमीयों, औरतों, बच्चों और बूढ़ों को घेरने की उनकी उम्मीद बढ़ गयी थी !

Cut to –

कमल, हाथ, झाड़ू, साइकिल, हाथी, हल, तीर, नगाड़ा, लालटेन, हँसिया – हथोड़ा,फूल – पत्ती , शंख, चक्र,गदा, टेलीफ़ोन, सब वस्तु और जीव पोस्टर पर क्रांतिकारी हो गए थे !

Cut to –

पोस्टर, तख्तियों और बैनर के रूप में नौजवान, आधुनिक, उदार, और भ्रष्ट जिन चार पोस्टरों ने मुझे घेरा था उसके पीछे और भी पोस्टर थे ! कोरस में स्वास्थ, सेक्स, विकास, नारी मुक्ति, धर्म, दूकान, सामान, मकान, तम्बाकू, सबके पोस्टर थे ! उनमे बहुत सारे शब्द और चित्र का कोलाज था ! सबके मिलेजुले रंग थे ! पोस्टर में वे कौन – कौन थे, क्या – क्या थे कहना मुश्किल था ! बचपन से ले कर अब तक इनमे से कई पोस्टरों से मैं मिल चूका था ! उस पर लिखी  हर बात पढ़ चूका था ! उनके रंग में बारी बारी से रंगा जा चूका था ! कई पोस्टर का नारा तो मुझे याद भी था ! कुछ पोस्टर हवा में लहरा रहे थे ! इन सब में विज्ञापन के सैकड़ों पोस्टर उनका साथ दे रहे थे ! सब बहुत अब्सर्ड था !

Cut to –

तभी एक धमाका हुआ और बीस हज़ार पोस्टर का गोला मेरे आगे फट गया ! अफरा तफरी मच गयी ! चारो तरफ पोस्टर ही पोस्टर थे ! सब पोस्टर पर थे ! जो पोस्टर पर नहीं थे वो पोस्ट पर थे ! बड़े बड़े पोस्ट पर बड़े बड़े पोस्टर थे ! मुझसे बार बार कहने लगे कि मैं अपनी पीठ उनको दे दूँ ! मुझे लगा थपथपाएंगे पर उन्होंने झट पट पीठ पर एक पोस्टर चिपका दिया ! अब पोस्टर देखते ही लोग पीठ पर चटका लगाने लगे ! पीठ सहलाने वाला कोई नहीं था ! पीठ थपथपाने वाले मौके का फायदा उठा के पोस्टर चिपका गए ! पोस्टर की वज़ह से पीठ में खुजली होने लगी ! मुझे अपनी खुजली मिटाने के लिए किसी और की पीठ खुजानी पड़ी !

Cut to –

पीठ से अच्छी जगह किसी पोस्टर के लिए अब नहीं बची है ! जिनके पास इच्छा है उनके पास अपनी पीठ है ! पोस्टर की दुनिया में अब पीठ ही पूँजी है ! पुलीस का हमला पीठ पर होता है ! सरकार का पेट पर ! पोस्टर ने उनको एक कर दिया है ! पोस्टर की दुनिया में पीठ और पेट एक हो गए हैं ! जैसे ही पीठ और पेट एक होते हैं हाथ लहराने लगता है ! हमारी पीठ अब सबसे महँगी खाली जगह है ! जब तक अपनी रीढ़ की हड्डी न बेचें पीठ के मालिक हम ही होते हैं !

Cut to –

अजब देश की गजब होली खेली जा रही थी ! ‘पोस्टर वार’ में मैंने देखा एक पोस्टर दूसरे पोस्टर पर कीचड उछाल रहा था !  हाथ और पाँव से बने पोस्टर थे ! पर वो शरीर के नहीं शोषण की बैचैनी के पोस्टर थे ! झंडे में लिपटी औरत का पोस्टर न देश का था न महिला उत्पीड़न का ! मुझे बहुत आश्चर्य हुआ वो महंगे जूते का पोस्टर था ! कुछ पोस्टर में जलते हुए शब्द थे ! उनका हर अक्षर आग से लिपटा धू धू कर रहा था ! फेफड़े का पोस्टर पेड़ के जड़ बने थे ! हर पोस्टर मानव बम लग रहा था ! पोस्टर पर बच्चों तक को हर्फ़ बना दिया गया था और खुद उनका बस्ता बन गए ! कई पोस्टर बदनाम थे ! उनका गज़ब इतिहास था ! उन पर कालिख पोती जा चुकी थी ! कीचड़ उछाला जा चूका था ! उन्हें फाड़ा गया था ! उनमे से कई जले हुए पोस्टर थे जिन्हे जलाया गया था ! सबके अंदर एक पोस्टर छुपा था ! सब अपने अंदर के छुपे पोस्टर के साथ अश्लील हरकतों की फैंटसी रखते थे ! इन सबके बीच नौटंकी के पोस्टर भी थे ! चाय के भी पोस्टर थे जिस पर वाह उस्ताद लिखा था !

Cut to –

अब मुझे पता चला की मेरे अंदर भी एक पोस्टर है ! मिक्स्ड फीलिंग वाला पोस्टर ! हम देखते पहले हैं और पढ़ते बाद में हैं ! चित्र पहले और शब्द बाद में ! बच्चा पहले देखना सीखता है और पढ़ना बाद में ! हम आज कल आस पास क्या देख रहे हैं ? पोस्टर के साथ चित्र, प्रदर्शनी, झांकी, सिनेमा, टेलीविजन, कवर पेज, और हेड लाइन्स ! रंग विरंगे शब्दों के झूठे खोखले वादे और एक दुसरे पर फेके गए बदरंग पानी के गुब्बारे ! शानदार, जानदार, ईमानदार, बिकाऊ, विरोधी, बईमान ,विचार, पत्रकार जैसे कई शब्द पोस्टर से निकल कर मुझे चारो तरफ से खींचने लगे ! मेरी घबराहट बढ़ गयी ! सब गड्ड मड्ड हो गया ! पोस्टरों ने खिचड़ी पका के दिमाग की दही जमा दी थी ! समाधान ‘हाथ’ में है, ‘झाड़ू’ घर में है, ‘कमल’ मन में खिला है फिर भी चारो तरफ भ्रष्टाचार है, महँगाई है, घरके बाहर गंदगी है और मन अशांत है ! चारो ओर ये कैसा ‘पोस्टर वार’ है ?   मैं चीखना चाहता था ! मेरी आँखें भर आयीं !

Cut to –

इतने में आकाश से संविधान – वाणी हुई ” मत भूल बेटा, तेरे पास है नोटा , फिर क्यों तू रोता ” … मैं जोर से चिल्लाया ! ” नॉन ऑफ़ द अबोव, नॉन ऑफ़ द अबोव,  नॉन ऑफ़ द अबोव ” फिर अंग्रेजी में चीखा NOTA , NOTA , NOTA  !!!  हनुमान चालीसा पढ़ते ही जैसे भूत भाग जाते हैं वैसे ही पोस्टर ने मुझे मुक्त कर दिया ! उन्हें देख कर लग रहा था जैसे उन्हें सांप सूँघ गया हो ! सर, सर करने लगे ! मेरी भी हिम्मत बढ़ी  ! मैंने चैन की सांस ली ! पोस्टर को पता चल गया था कि मुझे अपने अधिकार और जिम्मेदारियों के साथ अपनी सभी संवैधानिक सुविधाओं का ज्ञान है ! जितना उन्होंने सोचा था उतना मुर्ख नहीं हूँ ! मैं नए भारत का पढ़ा लिखा और अपना विवेक रखने वाला एक मतदाता हूँ जो स्वतंत्र है और निर्भीक है !

Cut to –

तभी नींद भंग हो गयी ! मेरी आँख खुल गयी ! लगा कोई मोहभंग हो गया है ! बहुत देर तक निढाल मैं बिस्तर पर पड़ा रहा ! हवा तेज़ थी देखा तो पंखा चल रहा था ! अब बाहर निकल कर चल रहे  ‘पोस्टर वार’ के हर पोस्टर की सच्चाई का मुझे सामना करना था !

( प्रभात खबर में प्रकाशित )

शब्द चित्र : तीन माइ’क के लाल उर्फ़ ‘बाकी बच गया अण्डा’

आज – कल सबको सुन रहा हूँ ! सब माइ’क के लाल लग रहे हैं … ! सब माइ’क के लाल कूद पड़े हैं … ! आप भी सुनिये ! मुझे बाबा नागार्जुन की उन्नीस सौ पचास में लिखी उनकी कविता ‘बाकी बच गया अण्डा’ की याद आ गयी …

माई'क का लाल - एक

माई’क का लाल – एक

माई'क का लाल - दो

माई’क का लाल – दो

माई'क का लाल - तीन

माई’क का लाल – तीन

बाकी बच गया अण्डा / नागार्जुन

पाँच पूत भारतमाता के, दुश्मन था खूँखार
गोली खाकर एक मर गया, बाक़ी रह गए चार

चार पूत भारतमाता के, चारों चतुर-प्रवीन
देश-निकाला मिला एक को, बाक़ी रह गए तीन

तीन पूत भारतमाता के, लड़ने लग गए वो
अलग हो गया उधर एक, अब बाक़ी बच गए दो

दो बेटे भारतमाता के, छोड़ पुरानी टेक
चिपक गया है एक गद्दी से, बाक़ी बच गया एक

एक पूत भारतमाता का, कन्धे पर है झण्डा
पुलिस पकड कर जेल ले गई, बाकी बच गया अण्डा

रचनाकाल : 1950

[1] गांधी [2] बोस [3] जिन्‍ना [4] नेहरु [5] जेपी

( Pic Credit : Google Search )

भीड़ के सामने माइक पर मैं भी किसी काल्पनिक आदमी को डाँटना चाहता हूँ !

मनःस्थिति अर्थात मनःस्टेटस

मेरी मिक्स्ड फीलिंग्स में जो आप महसूस कर रहे हैं वो भी मिला हुआ है …

*

जी हाँ मुझे भी ख़ुशी है ! आपको जिस बात की है, मुझे भी उसी बात की है बल्कि मुझे उन सारी बातों की ख़ुशी है जिस से आप खुश होते हैं !
जी हाँ मुझे भी दुःख है ! आपको जिस बात का है, मुझे भी उसी बात का है बल्कि मुझे उन सारी बातों का दुःख है जिस से आप दुखी होते हैं !
जी हाँ मै भी वही जा रहा हूँ जहाँ से आप हो आए हैं … या आज नहीं तो कल जाऊंगा ! वही खाऊँगा जो आपने खाया और उन सबसे मिलूँगा जिनसे आप मिल चुके !जी हाँ मै भी वही से आ रहा हूँ जहाँ आप जा रहे हैं … या आज नहीं तो कल जायेंगे ! वही खायेंगे जो मैंने खाया है और उन सबसे मिलेंगे जिनसे मै मिल चूका हूँ ! जी हाँ आप जो उखाड़ रहे हैं मै भी वही उखाड़ रहा हूँ ! जी हाँ, आप जो गाड़ रहे हैं मै भी वही गाड़ रहा हूँ ! आप जो पढ़ रहे हैं मै भी वही पढ़ रहा हूँ ! मै जो देख रहा हूँ आप भी वही सब देख रहे हैं ! जी हाँ, आप जिसको दे रहे हैं मै भी उसी को दे रहा हूँ … अपना सबकुछ ! आपकी जो ले रहे हैं मेरी भी वही ले रहे हैं…मेरा सबकुछ !आप जितनी मेहनत कर रहे हैं मै भी उतनी ही मेहनत कर रहा हूँ !
तो ?
तो आप मेरा Status पढ़ रहे हैं …! और हाँ, मैं आपका Status पढ़ चूका हूँ 😉

*

मेरे लिए आप जैसी चाहें राय बनायें मेरी सेहत पर तब तक असर नहीं होगा जब तक आप मेरे लिए दूध डाल के चीनी वाली चाय न बनायें !

*

मै यहाँ लिखूं या कहीं और पढूं ,आप बताएं या मै खुद समझूँ… अब सब एक है !

वहां आधा भरा और आधा खाली एक ग्लास था !

वहां आधा खाली और आधा भरा एक ग्लास था !
वहां आधा भरा और आधा खाली एक ग्लास था !
उसे आधा खाली ग्लास उठा के लाने कहा गया
और वो आधा भरा ग्लास उठा ले आया !
जिसे आधा खाली ग्लास चाहिए था
अब उसके पास आधा भरा ग्लास था !
वहां आधा खाली और आधा भरा एक ग्लास था !
वहां आधा भरा और आधा खाली एक ग्लास था !
खुश हो कर उसने आधा भरा ग्लास लाने किसी और को भेजा
और वो आधा खाली ग्लास ले आया !

जिसे भरा ग्लास चाहिए था अब उसके पास खाली ग्लास था !
वहां आधा भरा और आधा खाली एक ग्लास था !
वहां आधा खाली और आधा भरा एक ग्लास था !

Is the glass half empty or half full?

कोट – अनकोट – मिसकोट उर्फ़ मेरा कोट तेरा खोट

एक / मिसकोट उर्फ़ मेरा कोट तेरा खोट

कम शब्दों का इस्तेमाल मेरी अपनी शब्द साधना है ! बचपन से मिली कम बोलने और कम में बोलने की नसीहत पर जब अमल शुरू किया तो शब्दों की महत्ता समझ में आने लगी ! प्रस्तुत उदहारण शायद एक साधारण  दस्तूर हो पर मेरी अपनी समझ के लिए बहुत मत्वपूर्ण है ! बहुत ही मार्मिक घटना पर मेरी प्रतिक्रिया का जब ‘कोट‘ बना तो मामूली शब्दों के हेर फेर से अर्थ के वज़न में फर्क पड़ा और ‘कोट’ का ‘नाप’ बदल गया ! ‘कट – पेस्ट’ में ‘कोट’ कैसे बदल सकता है ? फिर ‘कोट’ कैसे बना ? शब्द बदलने से ‘कोट’ बदल सकता है और अपना ‘कोट’ किसी और के ‘माप’ का हो सकता है …

मैंने लिखा था – ‘पेशाब के रास्ते ‘मर्द’ पहुंचना कहाँ चाहते हैं ?’ और ‘कट पेस्ट’ से हो गया – ” मर्द पेशाब के रास्ते आखिर जाना कहां चाहता है.”
आज नहीं तो कल ऐसे ही मल्टी – मिडिया अर्थ के अनर्थ का कारण बन सकती है ! हमें शब्दों के प्रति सचेत रहना चाहिए और उसके मामूली परिवर्तन के प्रभाव को कभी अनदेखा नहीं करना चाहिए !

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कोट – अनकोट – मिसकोट उर्फ़ मेरा कोट तेरा खोट 

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दो / वर्ना हम Vernacular

कुछ दिन पहले अपने राज्य के एक अखबार के लोकल पन्ने पर मेरी फेसबुक प्रोफाइल छापी गयी !

ख़ुशी भी है और छोटी छोटी प्रिंटिंग मिस्टेक से दुःख भी ! ख़ुशी इस बात की ज्यादा है  कि सबने मेरा प्रोफाइल पढ़ा !

पर क्या मेरे फेसबुक पत्रकार मित्र महोदय मेरा प्रोफाइल पढ़ नहीं सके या क्या पता मेरा प्रोफाइल वहां पहुँचते पहुँचते थक गया हो और सब झिलमिल – झिलमिल हो गया हो !

खैर आप खुद देख लें वर्ना हम Vernacular कैसे होंगे ?

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मेरा बर्थडे २२ अगस्त है और ये फेसबुक को भी पता है !

२६ अप्रैल को मेरा STATUS था – ‘आप का मुखड़ा किसी जीवन का अंतरा है 🙂 ‘ ( ‘मंत्रा’ देना मुझे कहाँ आता है ? )

मेरी फिल्म का नाम ‘प्राण जाये पर शान न जाये है ‘

कई फिल्मों का निर्देशन मैंने नहीं किया है …तीन फिल्मे बनाई हैं ! एक फिल्म ‘मुंबई चकाचक’ रिलीज़ नहीं हुई है !

directorji@gmail.com मेरा इ मेल आई डी है URL (Uniform resource locator ) नहीं !

 

Parellel Cut – सत्यमेव जयते

220px-Emblem_of_India.svg_ ‘सत्यमेव जयते’ के एपिसोड देखता हूँ और दुसरे ब्लोग्स पर अपने मित्रों की टिप्पणियां भी पढता हूँ ! ये मेरे व्यग्तिगत विचार हैं या देखे गए हर एपिसोड पर मेरी टिप्पणी भी कह सकते हैं ! Parallel Cut में इसे मैंने सत्यमेव जयते के स्लोगन के तौर पर भी लिखा है ! सभी स्लोगन उस दिन का मेरा फेसबुक स्टेटस भी रह चूका है !

Parallel Cuts

अरे आप तो पहले एपीसोड में ही रो दिए…

– cut to

चलिए आप ने बताया हम मान लेते हैं ! पर अब इसके बाद …?

– cut to

ट्रिंग… ट्रिंग… ट्रिंग… !

दस (1 0 ) नौ ( 9 ) आठ ( 8 )

बच्चों रखो इसको याद !

ट्रिंग… ट्रिंग… ट्रिंग…

– cut to

‘सत्यमेव जयते’ सिक्के के एक पहलु पर लिखा होता है …और हर सिक्के के दो पहलु होते हैं !

– cut to

पता नहीं किस बात पर आमिर के साथ शर्म से रोना पड़े इस बार…

– cut to

‘दुल्हन ही दहेज़ है’ ये स्लोगन भी एक साजिश ही है ! दुल्हन के साथ दहेज़ शब्द का इस्तेमाल अज्ञानता है !

– cut to

अपना health पराया wealth !

– cut to

संडे – मेव – जयेते !

– cut to

सीढ़ी हो तो रेम्प हो ! … चाहे अपना ही set  क्यों न हो ?

– cut to

खाएँ ‘सत्यमेव जयते’ के डंडे …संडे के संडे !

– cut to

खाएं या न खाएं … संडे के संडे … सत्यमेव जयते के डंडे ?

– cut to

जात न पूछो नागरिक की !

– cut to

रोते रहते सत्यमेव जयते…

– cut to

काश मेरा भी कोई ‘जन कल्याण सहयोगी’ होता जो मेरे ‘सत्य’ के लिए लड़ता !

– cut to

सत्यमेव जयेते ‘चित’ हो गया रूपया ‘पट’ हो गया !

– cut to

सत्य के पूछ – ताछ की लड़ाई आज समाप्त हो जाएगी …

– cut to

बाहर से लोग आते रहे, बताते रहे, सिसकते रहे ! लगा अब लडेगा… अब लडेगा …बाहर निकलेगा सबको धराशायी कर देगा, हीरो जो है ! पर आज पता चला की करार सिर्फ बात करने का था …उकसाने का था, अंदर ही स्टूडियो में ! शब्द दिए गए थे उनको बोलना भर था ! बैक – ग्राउंड में संगीत बजा, एडिटिंग हुई, क्लोजअप्स कटे और आँखें रो दीं ! वेब साईट बना चर्चा हुई ! ब्लॉगिंग की गयी, ट्वीट हुआ स्टेटस बना और आज करार ख़त्म हो गया ! लीजिये सत्य की लड़ाई तक पहुँचते पहुँचते प्रोग्राम ही खत्म हो गया ! सत्य की जीत हुई या नहीं क्या पता ? पर आज ‘सत्यमेव जयते’ के भी पार हो गए हम ! कहिये अब नया ‘प्रोग्राम’ क्या हो ? एक ‘नयी शुरुआत’… पार्ट टू -‘सहयोग मेव दयेते’ ?

to be continued… ?

Satyamev-Jayathe