मनःस्थिति अर्थात मनःस्टेटस

मेरी मिक्स्ड फीलिंग्स में जो आप महसूस कर रहे हैं वो भी मिला हुआ है …

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जी हाँ मुझे भी ख़ुशी है ! आपको जिस बात की है, मुझे भी उसी बात की है बल्कि मुझे उन सारी बातों की ख़ुशी है जिस से आप खुश होते हैं !
जी हाँ मुझे भी दुःख है ! आपको जिस बात का है, मुझे भी उसी बात का है बल्कि मुझे उन सारी बातों का दुःख है जिस से आप दुखी होते हैं !
जी हाँ मै भी वही जा रहा हूँ जहाँ से आप हो आए हैं … या आज नहीं तो कल जाऊंगा ! वही खाऊँगा जो आपने खाया और उन सबसे मिलूँगा जिनसे आप मिल चुके !जी हाँ मै भी वही से आ रहा हूँ जहाँ आप जा रहे हैं … या आज नहीं तो कल जायेंगे ! वही खायेंगे जो मैंने खाया है और उन सबसे मिलेंगे जिनसे मै मिल चूका हूँ ! जी हाँ आप जो उखाड़ रहे हैं मै भी वही उखाड़ रहा हूँ ! जी हाँ, आप जो गाड़ रहे हैं मै भी वही गाड़ रहा हूँ ! आप जो पढ़ रहे हैं मै भी वही पढ़ रहा हूँ ! मै जो देख रहा हूँ आप भी वही सब देख रहे हैं ! जी हाँ, आप जिसको दे रहे हैं मै भी उसी को दे रहा हूँ … अपना सबकुछ ! आपकी जो ले रहे हैं मेरी भी वही ले रहे हैं…मेरा सबकुछ !आप जितनी मेहनत कर रहे हैं मै भी उतनी ही मेहनत कर रहा हूँ !
तो ?
तो आप मेरा Status पढ़ रहे हैं …! और हाँ, मैं आपका Status पढ़ चूका हूँ 😉

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मेरे लिए आप जैसी चाहें राय बनायें मेरी सेहत पर तब तक असर नहीं होगा जब तक आप मेरे लिए दूध डाल के चीनी वाली चाय न बनायें !

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मै यहाँ लिखूं या कहीं और पढूं ,आप बताएं या मै खुद समझूँ… अब सब एक है !

वहां आधा भरा और आधा खाली एक ग्लास था !

वहां आधा खाली और आधा भरा एक ग्लास था !
वहां आधा भरा और आधा खाली एक ग्लास था !
उसे आधा खाली ग्लास उठा के लाने कहा गया
और वो आधा भरा ग्लास उठा ले आया !
जिसे आधा खाली ग्लास चाहिए था
अब उसके पास आधा भरा ग्लास था !
वहां आधा खाली और आधा भरा एक ग्लास था !
वहां आधा भरा और आधा खाली एक ग्लास था !
खुश हो कर उसने आधा भरा ग्लास लाने किसी और को भेजा
और वो आधा खाली ग्लास ले आया !

जिसे भरा ग्लास चाहिए था अब उसके पास खाली ग्लास था !
वहां आधा भरा और आधा खाली एक ग्लास था !
वहां आधा खाली और आधा भरा एक ग्लास था !

Is the glass half empty or half full?

कोट – अनकोट – मिसकोट उर्फ़ मेरा कोट तेरा खोट

एक / मिसकोट उर्फ़ मेरा कोट तेरा खोट

कम शब्दों का इस्तेमाल मेरी अपनी शब्द साधना है ! बचपन से मिली कम बोलने और कम में बोलने की नसीहत पर जब अमल शुरू किया तो शब्दों की महत्ता समझ में आने लगी ! प्रस्तुत उदहारण शायद एक साधारण  दस्तूर हो पर मेरी अपनी समझ के लिए बहुत मत्वपूर्ण है ! बहुत ही मार्मिक घटना पर मेरी प्रतिक्रिया का जब ‘कोट‘ बना तो मामूली शब्दों के हेर फेर से अर्थ के वज़न में फर्क पड़ा और ‘कोट’ का ‘नाप’ बदल गया ! ‘कट – पेस्ट’ में ‘कोट’ कैसे बदल सकता है ? फिर ‘कोट’ कैसे बना ? शब्द बदलने से ‘कोट’ बदल सकता है और अपना ‘कोट’ किसी और के ‘माप’ का हो सकता है …

मैंने लिखा था – ‘पेशाब के रास्ते ‘मर्द’ पहुंचना कहाँ चाहते हैं ?’ और ‘कट पेस्ट’ से हो गया – ” मर्द पेशाब के रास्ते आखिर जाना कहां चाहता है.”
आज नहीं तो कल ऐसे ही मल्टी – मिडिया अर्थ के अनर्थ का कारण बन सकती है ! हमें शब्दों के प्रति सचेत रहना चाहिए और उसके मामूली परिवर्तन के प्रभाव को कभी अनदेखा नहीं करना चाहिए !

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कोट – अनकोट – मिसकोट उर्फ़ मेरा कोट तेरा खोट 

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दो / वर्ना हम Vernacular

कुछ दिन पहले अपने राज्य के एक अखबार के लोकल पन्ने पर मेरी फेसबुक प्रोफाइल छापी गयी !

ख़ुशी भी है और छोटी छोटी प्रिंटिंग मिस्टेक से दुःख भी ! ख़ुशी इस बात की ज्यादा है  कि सबने मेरा प्रोफाइल पढ़ा !

पर क्या मेरे फेसबुक पत्रकार मित्र महोदय मेरा प्रोफाइल पढ़ नहीं सके या क्या पता मेरा प्रोफाइल वहां पहुँचते पहुँचते थक गया हो और सब झिलमिल – झिलमिल हो गया हो !

खैर आप खुद देख लें वर्ना हम Vernacular कैसे होंगे ?

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मेरा बर्थडे २२ अगस्त है और ये फेसबुक को भी पता है !

२६ अप्रैल को मेरा STATUS था – ‘आप का मुखड़ा किसी जीवन का अंतरा है 🙂 ‘ ( ‘मंत्रा’ देना मुझे कहाँ आता है ? )

मेरी फिल्म का नाम ‘प्राण जाये पर शान न जाये है ‘

कई फिल्मों का निर्देशन मैंने नहीं किया है …तीन फिल्मे बनाई हैं ! एक फिल्म ‘मुंबई चकाचक’ रिलीज़ नहीं हुई है !

directorji@gmail.com मेरा इ मेल आई डी है URL (Uniform resource locator ) नहीं !

 

Parellel Cut – सत्यमेव जयते

220px-Emblem_of_India.svg_ ‘सत्यमेव जयते’ के एपिसोड देखता हूँ और दुसरे ब्लोग्स पर अपने मित्रों की टिप्पणियां भी पढता हूँ ! ये मेरे व्यग्तिगत विचार हैं या देखे गए हर एपिसोड पर मेरी टिप्पणी भी कह सकते हैं ! Parallel Cut में इसे मैंने सत्यमेव जयते के स्लोगन के तौर पर भी लिखा है ! सभी स्लोगन उस दिन का मेरा फेसबुक स्टेटस भी रह चूका है !

Parallel Cuts

अरे आप तो पहले एपीसोड में ही रो दिए…

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चलिए आप ने बताया हम मान लेते हैं ! पर अब इसके बाद …?

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ट्रिंग… ट्रिंग… ट्रिंग… !

दस (1 0 ) नौ ( 9 ) आठ ( 8 )

बच्चों रखो इसको याद !

ट्रिंग… ट्रिंग… ट्रिंग…

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‘सत्यमेव जयते’ सिक्के के एक पहलु पर लिखा होता है …और हर सिक्के के दो पहलु होते हैं !

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पता नहीं किस बात पर आमिर के साथ शर्म से रोना पड़े इस बार…

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‘दुल्हन ही दहेज़ है’ ये स्लोगन भी एक साजिश ही है ! दुल्हन के साथ दहेज़ शब्द का इस्तेमाल अज्ञानता है !

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अपना health पराया wealth !

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संडे – मेव – जयेते !

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सीढ़ी हो तो रेम्प हो ! … चाहे अपना ही set  क्यों न हो ?

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खाएँ ‘सत्यमेव जयते’ के डंडे …संडे के संडे !

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खाएं या न खाएं … संडे के संडे … सत्यमेव जयते के डंडे ?

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जात न पूछो नागरिक की !

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रोते रहते सत्यमेव जयते…

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काश मेरा भी कोई ‘जन कल्याण सहयोगी’ होता जो मेरे ‘सत्य’ के लिए लड़ता !

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सत्यमेव जयेते ‘चित’ हो गया रूपया ‘पट’ हो गया !

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सत्य के पूछ – ताछ की लड़ाई आज समाप्त हो जाएगी …

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बाहर से लोग आते रहे, बताते रहे, सिसकते रहे ! लगा अब लडेगा… अब लडेगा …बाहर निकलेगा सबको धराशायी कर देगा, हीरो जो है ! पर आज पता चला की करार सिर्फ बात करने का था …उकसाने का था, अंदर ही स्टूडियो में ! शब्द दिए गए थे उनको बोलना भर था ! बैक – ग्राउंड में संगीत बजा, एडिटिंग हुई, क्लोजअप्स कटे और आँखें रो दीं ! वेब साईट बना चर्चा हुई ! ब्लॉगिंग की गयी, ट्वीट हुआ स्टेटस बना और आज करार ख़त्म हो गया ! लीजिये सत्य की लड़ाई तक पहुँचते पहुँचते प्रोग्राम ही खत्म हो गया ! सत्य की जीत हुई या नहीं क्या पता ? पर आज ‘सत्यमेव जयते’ के भी पार हो गए हम ! कहिये अब नया ‘प्रोग्राम’ क्या हो ? एक ‘नयी शुरुआत’… पार्ट टू -‘सहयोग मेव दयेते’ ?

to be continued… ?

Satyamev-Jayathe