राग विकट

जनहित में ‘राग विकट’ ! ‘राग विकट’ को ‘देश राग’ में गाने की जरुरत नहीं है ! इसे ‘अपनी डफली – अपना राग’ में गाया जा सकता है !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
दफ़ा दफ़ा / क्यों ख़फ़ा, ख़फ़ा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
नफ़ा नफ़ा / सब सटा सटा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
सपा सपा / सब सफा सफा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
हटा हटा / सब बँटा बँटा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
रुका रुका / सब रुका रुका ! बढ़ा, बढ़ा / बस नमो नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
खुला खुला / मुंह खुला खुला ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
खिला खिला / कमल खिला / जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
सीला सीला / सब होंठ सीला ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

आ जपा / फिर मन भा जपा ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !
इकट विकट / सब महा टिकट ! जपा, जपा / मन नमो, नमो !

लघु प्रेम कथा / लप्रेक

 संक्षेप में मुझे प्रेम पर कुछ कहना था … मेरी आँखें भर आयीं … ! इससे संक्षेप में मैं प्रेम पर कुछ सोच भी नहीं सकता …

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प्रेम कहानी के पात्र अपना प्रेमी ढूंढ ही लेते हैं …

लप्रेक – १.

लड़की जाने लगी तो लड़के ने फटाफट मोबाइल से लिफ्ट में उसकी एक तस्वीर ले ली जिसमे लड़की मुस्कुराती हुई हाथ हिला के विदा ले रही थी, उसने अपने पूरे कपड़े तरतीब से पहन रखा था और खुश दिख रही थी ! लिफ्ट का दरवाज़ा बंद होते ही लड़के ने लम्बी सांस ली और फ़ोटो ऑप्शन में जा कर सेव का बटन दबा दिया ! आज उनकी अकेले में पहली मुलाकात थी ! प्रेम का कोंपल आज ही फूटा था …

*

लप्रेक – २.

नहीं ! हाँ ! फिर नहीं ! फिर हाँ ! फिर फिर नहीं ! फिर फिर हाँ ! नहीं ! हाँ ! नहीं ! हाँ ! नहीं ईईई … !! हाँ आँआ… !! बस ये उनकी आखरी बातचीत थी ! कम्प्यूटर पर दोनों मौन अपने अपने विंडो को घूरते रहते ! एक मन हाँ कहता और एक मन ना !

*

लप्रेक – ३.

वो ‘कैंडी क्रश’ से रूठती है तो मुझसे बात करती है !

*

लप्रेक – ४.

पैर लगते ही छन् से लगता है ह्रदय पर, हाथ झट पट उठा कर अपने ही गले से लगा लेता है अपने आप को … क्यों जरुरत होती है प्रेम में किसी के क़दमों पर फेंक देने की …खुद को ??

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लप्रेक – ५.

हंसती थी तो फंसती थी अब फंसती है तो रोती है…

*

लप्रेक – ६.

‘ऑरकुट’ में नाराज़ हुए थे, पूरा ‘व्हाट्सप’ चुप रहे अब जा कर ‘ट्विटर’ पर माने हैं बीच में ‘फेसबुक’ पर कितना स्टेट्स आ के चला गया …

*

लप्रेक – ७.

एक मन की मान लूं पर दूसरे मन को क्या जवाब दूं ? एक मन से कह दूं पर दूसरे मन से कैसे छुपाऊँ ? तू भी or not तू भी …

*

लप्रेक – ८.

‘हैशटैग’ के चकोर चौखट से बांध कर जब कोई लड़की किसी लड़के से प्रेम करती है तो प्रेमी फिर किसी बन्धन से बंधें न बंधें …

*

लप्रेक – ९ .

‘ काश वो मेरा ‘इनबॉक्स’ पढ़ पाती … ‘

*

लप्रेक – १०.

‘को – रस’ में ‘लव – रस’ :

सुनो लड़कियों – न लड़के साथ आए थे न लड़के साथ जायेंगे !

सुनो लड़कों – न लड़की साथ आयी थी न लड़की साथ जाएगी !

*

लप्रेक – ११.

दुष्यंत से मिल कर शकुंतला फिर अपने मन के सुनसान इन बॉक्स में लौट आई ! 

*

लप्रेक – १२.

मछली के पेट में अँगूठी बहुत दिनों तक नहीं रह सकी ! लेखक ने मछली को जाल में फंसवा के मछुआरे से उसकी पेट चिरवा दी और अँगूठी को राजा के सामने रखवा दिया ! शकुंतला की आँखों में आँसू भला कौन लेखक देख सकता है ?

*

लप्रेक – १३.

“… देखो इलेक्शन का रिजल्ट आ गया है, हमको अब मिलना जुलना कम कर देना चाहिए …”

*

लप्रेक – १४.

“… तुम टैग टैग, हम हैश हैश … ” 

*

लप्रेक – १५.

लड़का : स्माइली
लड़की : स्माइली
लड़का : स्माइली
लड़की : स्माइली
लड़का : स्माइली
लड़की : स्माइली
लड़का : स्माइली
लड़की : …

*

लप्रेक -१६.

कोई नाम … कोई चेहरा … कोई आँख … कोई आवाज़ … कोई होंठ … कोई पलक … कोई लौ … या कोई तस्वीर … कोई याद … कोई धुन … कोई गीत … कोई गंध … या कोई स्पर्श … और क्या है वैलेंटाइन ?

*

लप्रेक – १७.

जिससे लाभ होता है उसी से लव होता है !

*

लप्रेक – १८ .

कुचले जाने के लिए किसने अपनी अभिलाषाओं को प्रेम पथ पर फेंक दिया है …

*

लप्रेक -१९ .

कभी हम छोड़ देते हैं … कभी छूट जाता है … लघु प्रेम कथाएँ अंत में टीस भर ही देती हैं …

*

लप्रेक – २०.

रह रह कर उसका कलेजा मुंह को आता है ! घंटों बाथरूम में बैठ कर रोती है, उसका चश्मा भीगा ही रहता है ! उसको प्यार में धोखा मिला है ! उसके प्रेमी को कोई और पसंद आ गया है ! इतनी बिचारी उसे किसी ने कभी नहीं बनाया ! बिलख बिलख कर रो रही है और आँखें मूंदे चौदह तारीख का वैलेंटाइन वो आज बारह तारिख को ही फुसफुसा कर विश कर रही है ” हैप्पी वैलेंटाइन डे ”

*

लप्रेक – २१.

यादें फोन की घंटी की तरह बजती रहती है, नहीं उठाइए तो फिर कट जाती है …

*

लप्रेक – २२.

दाँत से काट के हमने आधे – आधे छुहारे नहीं खाये ! उसने मेरे कंधे पकड़ के हिलते डुलते अपनी सैंडल का फीता नहीं कसा ! उसके पास सवाल नहीं थे, मैंने कोई जवाब नहीं माँगा ! हम रूठे नहीं ! आते जाते सेंसर पर सिंपल बात हुई ! देखा, मुस्कुराए और अपने अपने रास्ते चल दिए ! शायद फिर से अजनबी होने का यही पहला कदम है …

लप्रेक – २३.

मैं चाहता तो उसकी पंख जैसी बाहें चुरा लेता पर उन्हें मैंने छोड़ दिया मैं किसी की आज़ादी नहीं चुरा सकता था ! मैं चाहता तो उसके पाँव ले भागता पर सपने में भी मैं उसे जंज़ीरों में नहीं देख सकता था ! मैं चाहता तो उसके बाल चुरा लेता पर उसके आशिक़ों को भी ठेस नहीं लगाना चाहता था ! सेंध मार के उसे चुरा ले भागने की योजना में आज सुबह मैं कामयाब हो गया था ! पर आखरी पल में मैंने अपना निर्णय बदल लिया, मैंने उसकी घडी से अपनी घडी मिलाई और अपने ह्रदय में रखी उसकी तस्वीर से उसका चेहरा मिला के छोड़ दिया ! उसे क्या पता एक हु बहु उस जैसे समय को दुनिया के लिए छोड़ आया हूँ और वो हर पल मेरे साथ है और मैंने उसे हमेशा के लिए चुरा लिया है  …

 

 

Cont.

पोस्टर – वार

चुनाव मैदान से ‘पोस्टर – वार’ का एक दृश्य ! इसमें मंच है ! पर्दा है ! पोस्टर है ! चेहरे हैं ! रंग है और नाटक का मसाला है !

Cut to –

चार पोस्टरों ने मुझे घेर लिया था ! चारों प्रचार पोस्टर थे ! शाब्दिक,ग्राफिक और तथ्यों से भरी उनकी अपनी – अपनी विचारधारा थी ! सब मुझ पर चिपकना चाह रहे थे ! एक सत्ता का पोस्टर था जो लगातार सत्ता में होने की वजह से परिवर्तन के सूत्रधार की भेष में था ! चेंज का एजेंट था ! देखने में हाथ से बना ये पोस्टर डिजिटल था ! दूसरा विपक्षी पोस्टर था ! वो जघन्य था ! रूढ़ियों से चिपका था ! तीसरा जनतांत्रिक पोस्टर था ! ये पोस्टर सबसे ज्यादा आकर्षक था क्योंकि इसमें मिडिल क्लास था ! चौथा पोस्टर एक कोलाज था ! जोड़ तोड़ से बना यह पोस्टर हिलते डुलते फ्रेम में किसी तरह फिट था ! ये चारो पोस्टर मुझे घेर के खड़े थे और मैं अवाक था ! जब बरसों तक सोयी राजनीती एक बड़ी करवट लेती दिखाई दे रही थी तभी ये घटना घट गयी थी ! पौ फटने को था ! सब जाग रहे थे ! मैं सुबह घूमने निकला था और उन्होंने सोचा मैं रात का भुला हूँ !

Cut to –

वार रूम था ! मुख्यालय था ! इनपुट डेटा था ! रणनीति थी ! तकनीक था ! उपकरण थे ! टीम थी ! प्रयोजन था ! कई दल थे ! ‘युद्ध’ का माहौल था ! हर तरफ बैठक चल रही थी ! रिजल्ट का सबको इंतज़ार था !

Cut to –

मैं पोस्टर में फँस कर चल नहीं पा रहा था ! आगे अब क्या करूँ कुछ सूझ नहीं रहा था ! पोस्टर से बच कर निकलने की मेरे पास कोई स्ट्रेटेजी नहीं थी ! सब पोस्टर से बच रहे थे और मैं फंस गया था ! पोस्टर मुझे घेर के अपने ‘आदमी घेरो अभियान’ में सफल हो गए थे और मैं ‘ पोस्टर से बचो ‘ खेल में हार गया था और अब शहर भर के सभी आदमीयों, औरतों, बच्चों और बूढ़ों को घेरने की उनकी उम्मीद बढ़ गयी थी !

Cut to –

कमल, हाथ, झाड़ू, साइकिल, हाथी, हल, तीर, नगाड़ा, लालटेन, हँसिया – हथोड़ा,फूल – पत्ती , शंख, चक्र,गदा, टेलीफ़ोन, सब वस्तु और जीव पोस्टर पर क्रांतिकारी हो गए थे !

Cut to –

पोस्टर, तख्तियों और बैनर के रूप में नौजवान, आधुनिक, उदार, और भ्रष्ट जिन चार पोस्टरों ने मुझे घेरा था उसके पीछे और भी पोस्टर थे ! कोरस में स्वास्थ, सेक्स, विकास, नारी मुक्ति, धर्म, दूकान, सामान, मकान, तम्बाकू, सबके पोस्टर थे ! उनमे बहुत सारे शब्द और चित्र का कोलाज था ! सबके मिलेजुले रंग थे ! पोस्टर में वे कौन – कौन थे, क्या – क्या थे कहना मुश्किल था ! बचपन से ले कर अब तक इनमे से कई पोस्टरों से मैं मिल चूका था ! उस पर लिखी  हर बात पढ़ चूका था ! उनके रंग में बारी बारी से रंगा जा चूका था ! कई पोस्टर का नारा तो मुझे याद भी था ! कुछ पोस्टर हवा में लहरा रहे थे ! इन सब में विज्ञापन के सैकड़ों पोस्टर उनका साथ दे रहे थे ! सब बहुत अब्सर्ड था !

Cut to –

तभी एक धमाका हुआ और बीस हज़ार पोस्टर का गोला मेरे आगे फट गया ! अफरा तफरी मच गयी ! चारो तरफ पोस्टर ही पोस्टर थे ! सब पोस्टर पर थे ! जो पोस्टर पर नहीं थे वो पोस्ट पर थे ! बड़े बड़े पोस्ट पर बड़े बड़े पोस्टर थे ! मुझसे बार बार कहने लगे कि मैं अपनी पीठ उनको दे दूँ ! मुझे लगा थपथपाएंगे पर उन्होंने झट पट पीठ पर एक पोस्टर चिपका दिया ! अब पोस्टर देखते ही लोग पीठ पर चटका लगाने लगे ! पीठ सहलाने वाला कोई नहीं था ! पीठ थपथपाने वाले मौके का फायदा उठा के पोस्टर चिपका गए ! पोस्टर की वज़ह से पीठ में खुजली होने लगी ! मुझे अपनी खुजली मिटाने के लिए किसी और की पीठ खुजानी पड़ी !

Cut to –

पीठ से अच्छी जगह किसी पोस्टर के लिए अब नहीं बची है ! जिनके पास इच्छा है उनके पास अपनी पीठ है ! पोस्टर की दुनिया में अब पीठ ही पूँजी है ! पुलीस का हमला पीठ पर होता है ! सरकार का पेट पर ! पोस्टर ने उनको एक कर दिया है ! पोस्टर की दुनिया में पीठ और पेट एक हो गए हैं ! जैसे ही पीठ और पेट एक होते हैं हाथ लहराने लगता है ! हमारी पीठ अब सबसे महँगी खाली जगह है ! जब तक अपनी रीढ़ की हड्डी न बेचें पीठ के मालिक हम ही होते हैं !

Cut to –

अजब देश की गजब होली खेली जा रही थी ! ‘पोस्टर वार’ में मैंने देखा एक पोस्टर दूसरे पोस्टर पर कीचड उछाल रहा था !  हाथ और पाँव से बने पोस्टर थे ! पर वो शरीर के नहीं शोषण की बैचैनी के पोस्टर थे ! झंडे में लिपटी औरत का पोस्टर न देश का था न महिला उत्पीड़न का ! मुझे बहुत आश्चर्य हुआ वो महंगे जूते का पोस्टर था ! कुछ पोस्टर में जलते हुए शब्द थे ! उनका हर अक्षर आग से लिपटा धू धू कर रहा था ! फेफड़े का पोस्टर पेड़ के जड़ बने थे ! हर पोस्टर मानव बम लग रहा था ! पोस्टर पर बच्चों तक को हर्फ़ बना दिया गया था और खुद उनका बस्ता बन गए ! कई पोस्टर बदनाम थे ! उनका गज़ब इतिहास था ! उन पर कालिख पोती जा चुकी थी ! कीचड़ उछाला जा चूका था ! उन्हें फाड़ा गया था ! उनमे से कई जले हुए पोस्टर थे जिन्हे जलाया गया था ! सबके अंदर एक पोस्टर छुपा था ! सब अपने अंदर के छुपे पोस्टर के साथ अश्लील हरकतों की फैंटसी रखते थे ! इन सबके बीच नौटंकी के पोस्टर भी थे ! चाय के भी पोस्टर थे जिस पर वाह उस्ताद लिखा था !

Cut to –

अब मुझे पता चला की मेरे अंदर भी एक पोस्टर है ! मिक्स्ड फीलिंग वाला पोस्टर ! हम देखते पहले हैं और पढ़ते बाद में हैं ! चित्र पहले और शब्द बाद में ! बच्चा पहले देखना सीखता है और पढ़ना बाद में ! हम आज कल आस पास क्या देख रहे हैं ? पोस्टर के साथ चित्र, प्रदर्शनी, झांकी, सिनेमा, टेलीविजन, कवर पेज, और हेड लाइन्स ! रंग विरंगे शब्दों के झूठे खोखले वादे और एक दुसरे पर फेके गए बदरंग पानी के गुब्बारे ! शानदार, जानदार, ईमानदार, बिकाऊ, विरोधी, बईमान ,विचार, पत्रकार जैसे कई शब्द पोस्टर से निकल कर मुझे चारो तरफ से खींचने लगे ! मेरी घबराहट बढ़ गयी ! सब गड्ड मड्ड हो गया ! पोस्टरों ने खिचड़ी पका के दिमाग की दही जमा दी थी ! समाधान ‘हाथ’ में है, ‘झाड़ू’ घर में है, ‘कमल’ मन में खिला है फिर भी चारो तरफ भ्रष्टाचार है, महँगाई है, घरके बाहर गंदगी है और मन अशांत है ! चारो ओर ये कैसा ‘पोस्टर वार’ है ?   मैं चीखना चाहता था ! मेरी आँखें भर आयीं !

Cut to –

इतने में आकाश से संविधान – वाणी हुई ” मत भूल बेटा, तेरे पास है नोटा , फिर क्यों तू रोता ” … मैं जोर से चिल्लाया ! ” नॉन ऑफ़ द अबोव, नॉन ऑफ़ द अबोव,  नॉन ऑफ़ द अबोव ” फिर अंग्रेजी में चीखा NOTA , NOTA , NOTA  !!!  हनुमान चालीसा पढ़ते ही जैसे भूत भाग जाते हैं वैसे ही पोस्टर ने मुझे मुक्त कर दिया ! उन्हें देख कर लग रहा था जैसे उन्हें सांप सूँघ गया हो ! सर, सर करने लगे ! मेरी भी हिम्मत बढ़ी  ! मैंने चैन की सांस ली ! पोस्टर को पता चल गया था कि मुझे अपने अधिकार और जिम्मेदारियों के साथ अपनी सभी संवैधानिक सुविधाओं का ज्ञान है ! जितना उन्होंने सोचा था उतना मुर्ख नहीं हूँ ! मैं नए भारत का पढ़ा लिखा और अपना विवेक रखने वाला एक मतदाता हूँ जो स्वतंत्र है और निर्भीक है !

Cut to –

तभी नींद भंग हो गयी ! मेरी आँख खुल गयी ! लगा कोई मोहभंग हो गया है ! बहुत देर तक निढाल मैं बिस्तर पर पड़ा रहा ! हवा तेज़ थी देखा तो पंखा चल रहा था ! अब बाहर निकल कर चल रहे  ‘पोस्टर वार’ के हर पोस्टर की सच्चाई का मुझे सामना करना था !

( प्रभात खबर में प्रकाशित )

एक बुलेट और दो प्रेमी – Cut to – ए ‘लभ स्टोरी’

मुझे एक जोड़ी लव स्टोरी मिली है ! शेयर कर रहा हूँ !
सड़क जैसी रहस्यमय और प्रेम जितनी सुंदर !

इस जोड़े से आप भी मिलिए !

साहचर्य का एक मुक्तक

साहचर्य का एक मुक्तक

उनके पास बहुत सा रंग था और दोनों पागल थे इसीलिए प्रेमी थे ! उन दोनों की चार आँखों में दो मछली रहती थी ! दोनों ‘बुलेट – बाज’ थे और ‘लभर’ थे ! ये उनकी ‘लभ स्टोरी’ है !

" इस पार मधु है तुम हो प्रिये , उस पार न जाने क्या होगा "

” इस पार मधु है तुम हो प्रिये , उस पार न जाने क्या होगा “

दो प्रेमी

दो प्रेमी

एक चश्मे-मूंछ वाला …

एक चश्मे-मूंछ वाला

एक चश्मे-मूंछ वाला

और एक मछली लंबे बालों वाली …

एक मछली लंबे बालों वाली

एक मछली लंबे बालों वाली

ये उनका प्रेम हस्ताक्षर था –

" एक चश्मे-मूंछ वाला और एक मछली लंबे बालों वाली '' / प्रेम हस्ताक्षर

” एक चश्मे-मूंछ वाला और एक मछली लंबे बालों वाली ” / प्रेम हस्ताक्षर

Cut to –

खुली आकाश के नीचे एक रात तारों के बीच दो प्रेमी ने एक सपना देखा !

Cut to –

उन्होंने एक घोसला बनाया , उसका नाम था  ‘Artologue – Art for all’

ये इस जोड़े का घोसला है जिसमे चित्र और शब्द के तिनके हैं !

जोड़े का घोसला

जोड़े का घोसला

'' इस बार फिर दीवाली में घरौंदा बनाएंगे और बच्चे हो जाएंगे "

” इस बार फिर दीवाली में घरौंदा बनाएंगे और बच्चे हो जाएंगे “

आशाओं के रंग

आशाओं के रंग

Cut to –

बुलेट

‘… और हम बुलेट के मालिक हो गए ‘ / भाग एक ,

‘… और हम बुलेट के मालिक हो गए / भाग दो

" बुलेट - बाज़ "

” बुलेट – बाज़ “

" बुलैट पर बैठता हूं तो शायद पूरा हो पाता हूं "

” बुलैट पर बैठता हूं तो शायद पूरा हो पाता हूं “

Cut to –

” दूई ठो भैलेन्टाइन – बीबी और बुलेट ” – सच हुआ हुआ एक सपना

" बीबी और बुलेट "

” बीबी और बुलेट “

Cut to –

तैयारी

रंग

रंग

बुलेट

बुलेट

" थोड़ी और सज जाए बुलेट तो क्या बुरा है "

” थोड़ी और सज जाए बुलेट तो क्या बुरा है “

First stop- Pune

First stop- Pune

Cut to –

Pune - Goa

Pune – Goa

‘बुलेट – बाज’ लभर दोनों निकल पड़े

" चल मेरी बुल्लेट "

” चल मेरी बुल्लेट “

एक बुलेट और दो प्रेमी

एक बुलेट और दो प्रेमी

MAG on the Move: Western Ghats

"प्रेम - पथ ''

“प्रेम – पथ ”

" ए शहर रंग दूंगा तुझे "

” ए शहर रंग दूंगा तुझे “

Cut to –

वायरिंग की समस्या हो गई । दो किलोमीटर धकेलना पड़ा …

आज का दिन बुलेट के नाम

आज का दिन बुलेट के नाम

Lessoning From Bullet

till i get my bullet back ...

till i get my bullet back …

मकेनिक अनूप सिंह

मकेनिक अनूप सिंह

Cut to –

मोटर – साईकिल डायरी    : यात्रा वृतांत

Goa

Goa

Cut to –

दाम्पत्य का सेल्फी

दाम्पत्य का सेल्फी

फ्रेम में तीनों दीवाने, जुनून का सेल्फी

फ्रेम में तीनों दीवाने, जुनून का सेल्फी

तीन फरवरी से तीन मार्च । पांच राज्य,सात शहर, नौ परिवार, छह पेंटिंग, 2000 किलोमीटर,एक हरी बुलेट, ढेर सारे रंग और डांगरी पहने दो पागल …

इस तस्वीर को डिफाइन करना मुश्किल है

इस तस्वीर को डिफाइन करना मुश्किल है

कैमरे की आंखों में आंखे डाले

कैमरे की आंखों में आंखे डाले

Cut to –

होसूर के द टाइटन स्कूल के 120 बच्चे और करीब तीस फीट लंबी और चार फीट चौड़ी दीवार…

प्रेमी मछली का समुद्री जीवन

प्रेमी मछली का समुद्री जीवन

Cut to –

बच्चों के अंदर के कला के तार छू आये दोनों …

कला से झंकृत बच्चे

कला से झंकृत बच्चे

बच्चों की हथेलियां उनकी यात्रा की बॉर्डर बनीं

बच्चों की हथेलियां उनकी यात्रा की बॉर्डर बनीं

Cut to –

दो पागल आए थे । हरी बुलेट पर सवार । कुछ रंग लेकर । लीप पोत कर चले गए । हमारा  घर । हमारा  दिल …

Tara and Mohanan Uncle's place Pune

Tara and Mohanan Uncle’s place Pune

Ravi Kasia and Pari , Goa

Ravi Kasia and Pari , Goa

Malini Manjunath Adiga Family, Kundapur

Malini Manjunath Adiga Family, Kundapur

Shirley Ann George Family

Shirley Ann George Family

तबरेज़ के घर की आज़ादी

तबरेज़ के घर की आज़ादी

Cut to –

शुक्रिया 'DL9SR 1583' यानी हरी बुलेट का / बुलेट की निजी डायरी

शुक्रिया ‘DL9SR 1583’ यानी हरी बुलेट का / बुलेट की निजी डायरी

Cut to –

आत्म मंथन

" हर छुट्टी ऐसी हो तो क्या बात होगी ... "

” हर छुट्टी ऐसी हो तो क्या बात होगी … “

card appears

” journey continues …

" पिक्चर अभी बाकी है दोस्त "

” पिक्चर अभी बाकी है दोस्त “

End Credits

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" Meenakshi Jha - Jey Sushil - Bullet "

” Meenakshi Jha – Jey Sushil – Bullet “

सुशील झा बी बी सी में कार्यरत हैं. उनकी शिक्षा जादूगोड़ा (झारखण्ड), जे एन यू और IIMC, दिल्ली में हुई. आजकल दिल्ली में रहते हैं. उनसे sushilkumar.jha@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है.

सुशील झा

सुशील झा

सब फोटो साभार: Artologue / Jey Sushil / Vikas Kumar Ashok Adepal / MAG- Meenakshi Art Gallery

Parellel Cut – ‘सत्यमेव जयते’ उर्फ़ ‘जिन्हे देश की फ़िक्र है’

Satyamev Jayate - The second season

Satyamev Jayate – The second season

आप सिर्फ अपने चेहरे पर झलकती ईमानदारी को टेलीविजन प्रोग्राम के लिए अपनी सुविधा से बेचते हो वर्ना देश की फ़िक्र जितनी आपको है उतनी आपके एक्टिंग की फ़िक्र देश की जनता को भी है …

cut to –

 

शब्द चित्र / जंगल – मंगल.

एक .

किस बात पर झगड़ा हुआ ये कोई नहीं जानता पर कल जंगल में एक अजगर घड़ियाल से भीड़ गया ! एक घंटे तक घमासान हुआ, दोनों में खूब गुत्थम – गुत्थी हुई और अंत में अजगर घड़ियाल को मार के निगल गया ! इस बात से जंगल में सनसनी फ़ैल गयी है … ! जिन्होंने ये घटना देखी उनकी आँखें फटी रह गयीं ! वो जंगल का नया इतिहास देख रहे थे ! कल तक जो घड़ियाल सबका पेट चीरता था आज मरा हुआ अजगर के पेट में पड़ा था ! घड़ियाल को निगलने के बाद अजगर का पेट घड़ियाल के आकार का हो गया था ! घड़ियाल की मोटी लम्बी कंटीली पूँछ, दांतों से भरा जबड़ा, खुरदुरे पैर सब शिथिल थे मानो उसने अजगर का पेट ओढ़ लिया हो ! जितना पचा नहीं सकता उससे ज्यादा अजगर ने खा लिया था और निढाल पड़ा था ! जंगल मुर्दा शान्ति से भर गया था ! सब जानते हैं कि जंगल में कोई नियम नहीं चलता और जंगल का यही नियम है … जंगल की लड़ाई में चाहे जो जीते, जीत जंगल की ही होती है !

दो .

कंकड़ कंकड़ जोड़ कर पानी पीने वाला कौव्वा जब प्यासा था, घमंडी खरगोश के साथ दौड़ता हुआ कछुआ जब हार जीत से आगे था, दुष्ट घडियाल जब अपने ही दोस्त का कलेजा खाने के सपने में खोया था, कबूतरों का दल जब बहेलिया के जाल से आज़ादी के लिए एक साथ उड़ चला, जब सब अपने भाग्य से लड़ रहे थे जंगल में तब भी सिंह का राज था