बड़े चाचा होल पंच जी

होल पंच जी का एक सौ इकतीसवाँ जन्मदिवस

गूगल – डूडल पर आज आदरणीय मशीन होल पंच जी का एक सौ इकतीसवाँ जन्मदिवस मनाया जा रहा है ! होल पंच का अाविष्कार आज के ही दिन हुआ था !

आज ही हमारे प्यारे चाचा नेहरू का एक सौ अठ्ठाईसवाँ जन्मदिन भी है ! दोनों एक ही दिन जन्मे हैं और चाचा नेहरू से होल पंच जी तीन साल बड़े हैं ! इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाले एक छोटे से उपकरण को गूगल ने मंगलवार को अपने होमपेज पर डूडल के तौर पर जगह दी है ! गूगल ने बाल दिवस के दिन छोटे चाचा नेहरू को नहीं पर उनसे तीन साल बड़े चाचा होल पंच को याद किया है !

चाचा नेहरू

होल पंच जी को भी चाचा नेहरू की ही तरह सब नाम से ही जानते हैं ! आज भी होल पंच का यूज पंच करके होल करने के लिए किया जाता है !

चाचा नेहरू के साथ होल पंच ने एक ही टेबल पर बरसों साथ काम किया और होल पंच जी ने नेहरू चाचा के किये हर काम में छेद कर के उसे फाइलों और रजिस्टरों में आने वाली पीढ़ियों के लिए नाथ दिया ! बड़े चाचा ने ही ब्रिटिश साम्राज्यवाद को ख़त्म होते हुए देखा ! स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रमंडल के साथ बने रहने में की गयी कागज़ी तैयारी में बड़े चाचा के योगदान को आज तक नहीं सराहा गया है !

आज जब हर तरफ डिजिटल का जोर है, ऐसे में एक 131 साल पुराना आविष्कार हमारे बीच अब भी प्रासंगिक है ! छोटे चाचा हमसे महारानी की पालकी ढुलवा के स्वर्ग सिधार गए पर मॉडर्न ऑटोमेशन वाले कंप्यूटर युग में रह कर भी बड़े चाचा होल पंच ने हमारा साथ नहीं छोड़ा है और हमारे काम आ रहे हैं !

विभाजन के बाद सीमा के दोनों ओर इंसान, इंसान के ख़ून का प्यासा हो गया था पर बड़े चाचा ने कभी कागज़ में छेद करना नहीं छोड़ा ! छोटे चाचा के लिखे भारत एक खोज को बड़े चाचा ने ही इतिहास की किताबों में नथ्थी कर के बचा के रखा !

राष्ट्र के आधुनिकीकरण के लिए छोटे चाचा नेहरू के प्रयासों में राष्ट्र को पश्चिमी बनाना नहीं बल्कि पश्चिमी संस्कृति के सर्वोत्तम पहलुओं को शामिल करके भारत का विकास करना था ! इसे बड़े चाचा ने ही समझा ! स्वतंत्र भारत में होल पंच जी की वजह से ही मानव जाति के इतिहास की बौद्धिक यात्रा का सही रिकॉर्ड बचा है ! कंप्यूटर के लिए उपनिषद, गौतम बुद्ध की शिक्षाओं, खगोल विज्ञान, गणित, योग और आयुर्वेद को बड़े चाचा होल पंच ने ही बचाया !

स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री का पद सँभालने के बाद छोटे चाचा ने बड़े चाचा को कभी अकेला नहीं छोड़ा !

बड़े चाचा की सादगी का ही नतीजा है कि स्कूल, ऑफिस और सरकारी दफ्तरों में आसानी से नजर आने वाली पंचिंग डिवाइस को राष्ट्रीय महत्व के नए प्रतीक की पहचान दिलाने की कोशिश आज तक नहीं की गयी है !

पंच किए गए कागज की बिंदियों से कौन नहीं खेला है ? आज छोटे चाचा नेहरू के जन्मदिवस पर बड़े चाचा होल पंच के लिए बी के नेहरू से शीर्षक उधार ले कर बस इतना कहूंगा ” प्रिय बड़े चाचा होल पंच जी, ‘ नाइस गाइज़ फ़िनिश सेकेंड !’ कागज़-कलम के दिवानों में होल पंच अमर रहे ! ”

बड़े चाचा होल पंच

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